रीवा। .संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय आवाहन पर रीवा मोर्चा के पदाधिकारियों ने सोमवार को बीज विधेयक 2025 के मसौदे का विरोध किए है। एसकेएम के पदाधिकारियों ने कहा कि यह विधेयक किसानों के हित में नही है और इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों और कॉर्पाेरेट का वर्चस्व स्थापित होगा। जिसके विरोध में किसान संगठन के पदाधिकारियों ने कमिश्नर कार्यालय रीवा के समक्ष बीज विधेयक 2025 के मसौदे की प्रतियाँ जलाकर विरोध दर्ज कराए है।
क्या है बीज विधेयक
एसकेएम मोर्चे के नेता शिव सिंह ने बताया कि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 12 नवंबर 2025 को बीज विधेयक 2025 का मसौदा जारी किया गया यह विधेयक पुराने बीज अधिनियम 1966 को बदलकर गुणवत्ता नियंत्रण और केवल प्रमुख अपराधों पर कड़ी दंड व्यवस्था लागू करने के लिए बनाया गया है। एसकेएम इस प्रतिगामी विधेयक की कड़ी निंदा करता है जो भारतीय बीज क्षेत्र पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों और कॉर्पाेरेट का वर्चस्व स्थापित करेगा, खाद्य सुरक्षा व बीज संप्रभुता को गंभीर रूप से कमजोर करेगा और राज्यों के संघीय अधिकारों को कुचल देगा। एसकेएम इसकी तत्काल वापसी की मांग करता है।
यह विधेयक भारत में जीविका-आधारित कृषि के लिए विनाशकारी
किसान नेता ने बताया कि यह बीज विधेयक एमएनसी और कॉर्पाेरेट को बीज आपूर्ति पर नियंत्रण प्रदान करेगा और वही लक्ष्य पूरा करेगा जो अनुबंध खेती कानून लेकर आया था। इससे फसल चक्र कॉर्पाेरेट बाज़ार के हितों के अनुसार बदल जाएंगे, तथा यह विधेयक भारत में जीविका-आधारित कृषि के लिए विनाशकारी है। यदि इसे लागू होने दिया गया तो बेयर बीएएसएफ सिंगेंटा एडवांटा इंडिया कॉर्टेवा एग्रीसाइंस इंडिया महायको जैसी कंपनियाँ भारतीय बीज क्षेत्र व कृषि उत्पादन पर नियंत्रण कर लेंगी और किसान आधारित कृषि को नष्ट कर देंगी।
ये किसान नेता रहे मौजूद
विरोध प्रदर्शन दौरान मोर्चे के नेता सोभनाथ कुशवाहा, इंद्रजीत सिंह शंखू, संतकुमार पटेल फौजी, यदुवंश प्रताप सिंह, लोकनाथ पटेल, अनिल मिश्रा, वीरेंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह, प्रदीप पटेल, मनधीर सिंह, मयंक सिंह, ओम सिंह बघेल आदि उपस्थित रहे।
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