Rewa District Lalgaon Fair : बसंत पंचमी पर भैरवबाबा मंदिर का ऐतिहासिक मेला-रीवा जिले की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में बसंत पंचमी का विशेष स्थान है। इसी क्रम में जिला मुख्यालय रीवा से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित लालगांव कस्बे के भैरवबाबा मंदिर झिरिया में बसंत पंचमी के पावन अवसर पर एक भव्य और ऐतिहासिक मेले का आयोजन किया गया। यह मेला केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण भी है, जो सैकड़ों वर्षों से निरंतर आयोजित होता आ रहा है। रीवा जिले के लालगांव स्थित भैरवबाबा मंदिर झिरिया में बसंत पंचमी पर सैकड़ों वर्षों पुराना भव्य मेला आयोजित हुआ। जानिए मेले की परंपरा, आकर्षण और सुरक्षा व्यवस्था।
सैकड़ों वर्षों पुरानी परंपरा का प्रतीक मेला
भैरवबाबा मंदिर झिरिया में लगने वाला यह मेला अपनी प्राचीन परंपरा और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन यहां दर्शन करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। दूर-दराज़ के गांवों और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और भैरवबाबा की पूजा-अर्चना करते हैं।
मनोरंजन, खरीदारी और स्वाद का अनोखा संगम
मेले में मनोरंजन के विविध साधन लोगों को खासा आकर्षित करते हैं-बच्चों और युवाओं के लिए खेल-कूद, झूले और मनोरंजक गतिविधियां प्रमुख आकर्षण बनी रहीं।मेले में खरीदारी के लिए पारंपरिक और रोज़मर्रा की वस्तुओं की दुकानें सजी रहीं। वहीं, मिष्ठान स्टॉल मेले की रौनक को और बढ़ाते नजर आए। विशेष रूप से जलेबी की दुकानों पर सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली। स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, मेले के दौरान जलेबी और अन्य मिठाइयों की मांग कई गुना बढ़ जाती है और लोग बड़ी मात्रा में खरीदारी करते हैं।
धार्मिक आस्था और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक
यह मेला केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक एकता और भाईचारे का भी संदेश देता है। श्रद्धालु मंदिर में पूजा करने के साथ-साथ पारंपरिक आयोजनों में भाग लेते हैं और सामाजिक मेलजोल को बढ़ावा देते हैं। साथ ही, यह मेला स्थानीय व्यापारियों, कारीगरों और छोटे दुकानदारों के लिए रोजगार और आय का महत्वपूर्ण स्रोत भी बनता है।
सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
मेले के दौरान लालगांव उपथाने के अंतर्गत स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए जिसमें भीड़ नियंत्रण,स्वास्थ्य संबंधी सतर्कता,कानून-व्यवस्था बनाए रखने जैसे सभी पहलुओं पर पुलिस और समाजसेवी संगठनों की संयुक्त निगरानी रही, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
निष्कर्ष (Conclusion)-बसंत पंचमी के अवसर पर लालगांव के भैरवबाबा मंदिर झिरिया में आयोजित मेला धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है। यह मेला न केवल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और परंपराओं को भी सशक्त बनाता है। आने वाले वर्षों में भी यह ऐतिहासिक मेला इसी भव्यता और श्रद्धा के साथ लोगों को आकर्षित करता रहेगा।
