रीवा। जिले के नवागत कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने मंगलवार को अपनी पहली जनसुनवाई में कड़े तेवर दिखाकर प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया। कलेक्टर ने स्पष्ट कर दिया है कि जनता के काम में लापरवाही और भ्रष्टाचार अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तकनीक का नवाचार करते हुए उन्होंने प्रोजेक्टर के जरिए जिले के सभी एसडीएम और तहसीलदारों को वर्चुअली जोड़कर फरियादियों की शिकायतों का मौके पर ही निराकरण शुरू किया। जनसुनवाई की संवेदनशीलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि निर्धारित समय बीतने के बाद भी कलेक्टर दोपहर 2 बजे तक रुके रहे और एक-एक पीड़ित की समस्या सुनी।
रिश्वतखोरी और जमीन नामांतरण में गड़बड़ी पर कड़ा प्रहार
जनसुनवाई के दौरान हुजूर तहसील के दुआरी क्षेत्र का एक गंभीर मामला सामने आया, जहाँ फरियादी प्रीतम द्विवेदी ने भू-माफियाओं की मनमानी और प्रशासनिक मिलीभगत की शिकायत की। पीड़ित ने बताया कि प्लॉट खरीदने के बाद तकनीकी गड़बड़ी के कारण उनका नामांतरण अटका हुआ है और संबंधित पटवारी द्वारा कार्य के बदले रिश्वत की मांग की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर सूर्यवंशी ने तत्काल ‘ऑन द स्पॉट’ कार्रवाई की और लापरवाही बरतने वाले संबंधित नायब तहसीलदार एवं दोषी पटवारी पर जुर्माना लगा दिया। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि सभी तहसीलदार अपने स्तर पर ही समस्याओं का गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करें, ताकि जनता को जिला मुख्यालय के चक्कर न काटने पड़ें।
पानी को तरस रहे दिव्यांग दंपति की सुनी पुकार
कलेक्टर के सामने पेयजल संकट की हृदय विदारक तस्वीरें भी सामने आईं। लालगांव के पचोखर गांव से पहुंचे नेत्रहीन दिव्यांग दंपति, विनायक प्रसाद तिवारी और सरस्वती तिवारी ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि वे इस भीषण गर्मी में डेढ़ किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। वहीं, सिरमौर के पिपरी गांव से आए एक अन्य फरियादी ने भी परिवार द्वारा पानी भरने से रोकने की शिकायत की। इन मानवीय संवेदनाओं से जुड़े मामलों पर कलेक्टर ने तत्काल संज्ञान लिया और संबंधित अधिकारियों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए त्वरित पेयजल व्यवस्था कराने के कड़े निर्देश दिए। कलेक्टर ने दो टूक कहा कि अधिकारी सरकार की मंशा के अनुरूप पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ काम करें।

