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रीवा के आलोक शुक्ला के नाटक ‘अजीब दास्तां’ ने पटियाला में लूटी तालियां, 80 मिनट तक खामोश और भावुक रहे दर्शक

Alok Shukla's play 'Ajib Dastaan' from Rewa won applause in PatialaAlok Shukla's play 'Ajib Dastaan' from Rewa won applause in Patiala

Alok Shukla's play 'Ajib Dastaan' from Rewa won applause in Patiala

पटियाला। श्रीराम सिंह आनंद राम चानालरी नेशनल थिएटर फेस्टिवल के दूसरे दिन 26 नवंबर की शाम रीवा के जाने-माने रंगकर्मी आलोक शुक्ला के लिखित-निर्देशित चर्चित नाटक ‘अजीब दास्तां’ का जोरदार मंचन हुआ। प्रस्तुति प्रासंगिक समूह रीवा की दिल्ली इकाई ने की।नाटक आज के महानगरीय परिवार की करुण दास्तान है – तलाकशुदा मां-बाप, नई जिंदगी की तलाश में नए पार्टनर और इस सबके बीच ड्रग्स की गिरफ्त में फंसा टीनएजर बेटा। नाटक की शुरुआत सुधारगृह से होती है जहां मां-बाप अलग-अलग जिंदगी जीते हुए भी अपने बच्चे की हालत के लिए खुद को दोषी मानते हैं। अंत में बच्चे का एक सवाल पूछता है – “मेरे इस हाल का जिम्मेदार कौन?”80 मिनट के इस भावपूर्ण प्रस्तुति ने पटियाला के ऑडिटोरियम में मौजूद करीब दो सौ दर्शकों को इस कदर बांधे रखा कि कोई खांसा तक नहीं।

आलम यह था कि नाटक खत्म होने के बाद भी दर्शक अपनी सीटों से नहीं उठे। लेखक-निर्देशक आलोक शुक्ला खुद अटेंडेंट का किरदार भी निभा रहे थे और कलाकारों के साथ फोटो खिंचवाने व बधाई देने की होड़ मच गई। नाटक में मुख्य भूमिकाओं में सुरभि (नतेशा), मोनाली (कविता), जानकी (निकिता), निखिल कुमार (आदित्य उर्फ अप्पू), मृदुल कुमार (प्रणय व मिस्टर गुप्ता), अनुराग व प्रदीप (टेकचंद), प्रताप सिंह (पिता) और विनय शर्मा (कूरियर बॉय) ने दमदार अभिनय किया।

वहीं मंच सज्जा में टेकचंद व कविता, प्रकाश-ध्वनि में टेकचंद व विनय शर्मा और वस्त्र-रूप सज्जा में नतेशा व निकिता और
गायन-वादन में अभ्युदय मिश्रा ने अहम भूमिका निभाई। दर्शकों ने नाटक को “आज के टूटते परिवारों का आईना” बताते हुए खूब वाहवाही की। कई दर्शकों की आंखें नम थीं और तालियां देर तक गूंजती रहीं। फेस्टिवल में ‘अजीब दास्तां’ इस बार की सबसे चर्चित प्रस्तुति बनकर उभरी।

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