रीवा। रीवा में उग्र प्रदर्शन करके शहर में जाम की स्थित निर्मित करने एवं शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करते हुए प्रशासन के साथ गलत तरीके से पेश आने वाले तकरीबन 400 प्रदर्शन कारियों पर अब प्रशासन का डंडा चल गया है। एसडीएम की शिकायत पर सिविल लाइन थाना की पुलिस ने बिना अनुमति के सड़क जाम करने, कोल्हल अधिनियम एवं शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न जैसी गैर जमानती धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।
यूजीसी के नए नियमों के समर्थन में उग्र आंदोलन
ज्ञात हो कि सोमवार को एसटी-एससी और ओबीसी महासभा के संयुक्त मोर्चा द्वारा यूजीसी के नए नियमों के समर्थन में एक आंदोलन रीवा में आयोजित किया गया था। जिसमें शामिल सैकड़ों लोग विवेकानंद पार्क में एकत्रित होकर शहर के मुख्य मार्गो से प्रदर्शन करते हुए निकले। इस दौरान वे साउंड सिस्टम में तेज आवाज के साथ शहर में जुलूश निकाले और कलेक्टर कार्यालय के बाहर मुख्य मार्ग को बाधित रखा। तकरीबन 5 घंटे तक शहर का मुख्य मार्ग बाधित रहा, जिससे आम लोगों को भारी असुविधा हुई। इस पर प्रशासन अब सख्त हो गया है।

कुत्ते को दिए थें ज्ञापन
आंदोलन कर रहे महासभा के लोग कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन देने के लिए पहुचे थें। उनका ज्ञापन लेने के लिए एसडीएम, एडीएम समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे, लेकिन आदोलन कारी उन्हे ज्ञापन देने के लिए तैयार नही हुए और वे कलेक्टर को मौके पर बुलाने की मांग करते रहे। बताया जाता है कि जिस समय यह आंदोलन चल रहा था, उस समय कलेक्टर प्रतिभा पाल कमिश्नर कार्यायल में आयोजित वीडियों कॉनफ्रेसिंग में थी। कलेक्टर के न पहुचने पर महासभा के लोग गेट पर नारेबाजी करते रहे। बाद में उन्होने कुत्ते के गले में ज्ञापन कॉपी को बांधकर कलेक्ट्रेट में छोड़ दिए। एसडीएम ने बताया कि आंदोलन कर रहे लोगो का व्यवहार प्रशासन के प्रति बेहद ही खराब रहा, जबकि उन्हे लगातार समझाइस दी जा रही थी।
एसडीएम की शिकायत पर एफआईआर
आंदोलन कारियों द्वारा जिस तरह से कार्य किया गया। उसे प्रशासन ने गंभीरता से लिया और देर रात एसडीएम अनुराग त्रिपाठी समेत अन्य अधिकारी सिविल लाइन थाना पहुचें। उन्होने सिविल लाइन थाने में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। जिस पर पुलिस ने संयुक्त मोर्चा के 400 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया है। पुलिस अब सीसीटीवी एवं वीडियों फुटेज के आधार पर आंदोलन में शामिल लोगो की पहचान कर रही है।
