हर माता-पिता की लाइफ में दो लक्ष्य सबसे जरूरी होते हैं – बच्चों की अच्छी पढ़ाई और अपना आरामदायक रिटायरमेंट. स्कूल तक तो खर्च मैनेज हो जाता है, लेकिन कॉलेज की लाखों की फीस और रिटायरमेंट के बाद 20-25 साल की जिंदगी के लिए पहले से प्लानिंग करनी पड़ती है. ये दोनों ही ऐसे लक्ष्य हैं जिन्हें टाला नहीं जा सकता.
तो सवाल है कि इन्हें पूरा कैसे करें?
पोर्टफोलियो के दो काम होते हैं
मान लीजिए आपने अपने लक्ष्यों के लिए एक पोर्टफोलियो बना रखा है. उसके दो रोल हैं.
ग्रोथ – यानी महंगाई से ज्यादा रिटर्न कमाना और लंबे समय में दौलत बनाना. इसके लिए इक्विटी और म्यूचुअल फंड सबसे अच्छे माने जाते हैं क्योंकि आपके पास समय होता है.
निश्चितता – कुछ लक्ष्य ऐसे होते हैं जिनकी तारीख और खर्च दोनों फिक्स होते हैं. सेंसेक्स गिर जाए तो बच्चे का एडमिशन तो नहीं रुकेगा. घर का डाउन पेमेंट टाइम पर देना ही है और रिटायरमेंट 60 साल पर ही होगी, बाजार सुधरने का इंतजार नहीं करेगी.
ऐसे फिक्स लक्ष्यों के लिए सिर्फ औसत रिटर्न काफी नहीं है, पैसा सही समय पर हाथ में होना चाहिए. यहीं पर गारंटीड प्लान काम आते हैं. मार्केट में oneInsure जैसे प्लेटफॉर्म इसी तरह के प्लान के लिए लोगों की मदद कर रहे हैं.
गारंटीड प्लान बाकी प्लान से कैसे अलग है?
- रिटर्न पहले से तय होता है
आप जिस दिन प्लान लेते हैं, उसी दिन कंपनी आपका रिटर्न फिक्स कर देती है. 5 साल बाद ब्याज दरें गिर जाएं या शेयर बाजार टूट जाए, आपके प्लान पर कोई असर नहीं होगा. आपको दोबारा निवेश के जोखिम से भी नहीं गुजरना पड़ता.
- टैक्स में फायदा मिल सकता है
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 10(10D) के तहत कुछ शर्तें पूरी करने पर गारंटीड प्लान पर मैच्योरिटी की रकम टैक्स फ्री हो सकती है. वहीं FD या डेट फंड के ब्याज पर आपके स्लैब के हिसाब से पूरा टैक्स लगता है. इसलिए भले ही गारंटीड प्लान का रिटर्न कम लगे, टैक्स के बाद हाथ में आने वाला पैसा कई बार ज्यादा होता है.
- लाइफ कवर के साथ लक्ष्य सुरक्षित
खराब स्थिति में अगर कमाने वाले व्यक्ति के साथ कुछ हो जाता है, तो भी लक्ष्य नहीं रुकता. कई गारंटीड प्लान में लाइफ कवर मिलता है, जिससे प्रीमियम न भरने पर भी पॉलिसी चलती रहती है और लक्ष्य के समय पैसा मिल जाता है. ये सुविधा FD या डेट फंड में नहीं मिलती.
- पैसा लॉक होना भी फायदेमंद
गारंटीड प्लान में पैसा कई सालों के लिए लॉक हो जाता है और बीच में निकालने पर पेनाल्टी लगती है. सुनने में ये नुकसान लगता है, पर लंबे लक्ष्यों के लिए यही अच्छी बात है. जो पैसा आसानी से निकल जाता है वो घर की मरम्मत या शादियों में खर्च हो जाता है. लॉक-इन की वजह से आप लक्ष्य तक पैसे को हाथ नहीं लगाते.
ध्यान रखने वाली बात
इसका मतलब ये नहीं कि सारा पैसा गारंटीड प्लान में लगा दें. 15 साल से ज्यादा के नजरिए से देखें तो इक्विटी का रिटर्न अक्सर गारंटीड प्लान से काफी ज्यादा होता है. और समय से पहले पैसा निकालने पर भारी नुकसान भी हो सकता है.
इसलिए 15-25℅ पैसा गारंटीड में तो बाकी इक्विटी में रखें.

