तमिलनाडु में वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ प्रस्ताव पारित, M K STALIN का क्या कहता है STYLE!

स्टालिन (M K STALIN) ने इसे भाजपा की विभाजनकारी नीति का हिस्सा बताया और कहा, “यह अल्पसंख्यकों के खिलाफ व्यवस्थित भेदभाव का एक और उदाहरण है

Resolution passed against Wakf Amendment Bill: तमिलनाडु विधानसभा ने गुरुवार को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से वक्फ संशोधन विधेयक वापस लेने की मांग की। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन (M K STALIN) ने इस विधेयक को मुस्लिम समुदाय के धार्मिक और संपत्ति अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया।

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गैर भाजपा शासित राज्यों के खिलाफ भेदभाव

प्रस्ताव पेश करते हुए स्टालिन (M K STALIN) ने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर अल्पसंख्यकों और गैर भाजपा शासित राज्यों के खिलाफ व्यवस्थित भेदभाव का आरोप लगाया। वक्फ विधेयक से पहले भी स्टालिन कई मुद्दों पर केंद्र के खिलाफ बोलते रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या स्टालिन विपक्ष का नया चेहरा बनकर उभरने की कोशिश कर रहे हैं? स्टालिन ने विधानसभा में कहा कि यह विधेयक वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता को कमजोर करता है और सरकारी हस्तक्षेप को बढ़ाता है। उन्होंने दावा किया कि वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने और गैर-मुस्लिमों द्वारा बनाए गए वक्फ को अवैध घोषित करने जैसे विधेयक के प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 26 (धार्मिक स्वतंत्रता) का उल्लंघन करते हैं।

अल्पसंख्यकों के खिलाफ व्यवस्थित भेदभाव- M K STALIN

स्टालिन (M K STALIN) ने इसे भाजपा की विभाजनकारी नीति का हिस्सा बताया और कहा, “यह अल्पसंख्यकों के खिलाफ व्यवस्थित भेदभाव का एक और उदाहरण है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यह विधेयक मुस्लिम भावनाओं को ठेस पहुंचाता है और धार्मिक सद्भाव को खतरे में डालता है। इस दौरान भाजपा विधायकों ने वॉकआउट किया, जबकि डीएमके के सहयोगी और विपक्षी एआईएडीएमके ने प्रस्ताव का समर्थन किया। एमके स्टालिन डीएमके के अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं।

केंद्र सरकार के खिलाफ मुखर रहे हैं M K STALIN

स्टालिन (M K STALIN) हाल के वर्षों में केंद्र सरकार के खिलाफ मुखर रहे हैं। उनकी रणनीति न केवल तमिलनाडु के हितों की रक्षा करना है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता को मजबूत करने की ओर भी इशारा करती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में डीएमके के शानदार प्रदर्शन (तमिलनाडु में 39 में से 39 सीटें भारत गठबंधन ने जीतीं) के बाद स्टालिन की स्थिति मजबूत हुई है। क्या कांग्रेस के कमजोर होते प्रभाव के बीच वह विपक्ष के नए नेता बनने की राह पर हैं? इसके लिए हमें उनके हालिया केंद्र विरोधी बयानों और मुद्दों पर गौर करना होगा।

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