Report released by NITI Aayog। देश का भविष्य कहे जाने वाले युवाओं को लेकर NITI Aayog की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। देश में युवाओं का एक बड़ा हिस्सा नौकरी, शिक्षा और स्किल ट्रेनिंग से दूर है। नीति आयोग की रिपोर्ट Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047 ke मुताबिक देश के 8.7 करोड़ युवाओं पास रोजगार नहीं है। अगस्त 2026 में जारी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 में देश में 15 से 29 वर्ष के युवा ना पढ़ाई कर रहे, ना रोजगार में हैं, न किसी तरह की ट्रेनिंग ले रहे है। 15 से 29 वर्ष के 8.7 करोड़ युवा NEET श्रेणी में आता हैं। NEET यानी Not in education, Employment,or Training- यानी ऐसे युवा जो ना पढाई कर रहे हैं, ना किसी रोजगार से जुड़े हैं, ना किसी तरह का प्रशिक्षण ले रहे है। ये रिपोर्ट 18 अगस्त 2026 को जारी की है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह आंकड़ा 2021 के राष्ट्रिय नमूना सर्वेक्षण के डेटा पर आधारित है।
आयोग की रिपोर्ट ने युवाओं के लिए किफायती और सब्सिडी वाली ट्रेनिंग के साथ वित्तीय सहायता देने की बात की है। आयोग ने स्वरोजगार और स्थानीय स्तर पर ट्रेनिंग की सुविधा कराने की उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
डिग्री और नौकरी में तालमेल नहीं
आयोग की रिपोर्ट से एक बात और स्पष्ट तौर सामने आई है कि देश में शिक्षा और रोजगार के बीच गहरा असंतुलन है। रिपोर्ट के अनुसार देश में केवल 8.25 प्रतिशत स्नातक युवा ही उनकी शैक्षणिक योग्यतानुसार नौकरी कर रहे हैं। आयोग का कहना है स्किल ट्रेनिंग की लागत भी युवाओं के बाधा बनती है। कम आय वर्ग से आने वाले छात्र पहले ही कॉलेज और टूशन फीस के लागत ज्यादा होने से संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में महंगी स्किल ट्रेनिंग करना उनके लिए मुश्किल है। आयोग ने युवाओं के लिए किफायती और सब्सिडी वाली ट्रेनिंग के साथ वित्तीय सहायता देने की बात की है। आयोग का मानना है कि स्किल डेवेलपमेंट को स्कूल से ही शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाए। इसके अलावा कक्षा 6 से 12 तक जनरल एम्प्लॉयबिलिटी एंड एंट्रेप्रेन्योरशिप को व्यापक स्तर शुरू करने का सुझाव दिया है।
आयोग ने शिक्षा और रोजगार के बीच मौजूद गैप को कम करने के लिए अप्रेंटिसशिप को महत्त्व दिया है। इससे छात्रों को वर्कप्लेस का अनुभव मिलेगा और प्रैक्टिकल नॉलेज में इजाफा होगा
महिलाओं के लिए विशेष रणनीति की जरुरत
देश के 8.7 करोड़ युवाओं में महिलाओं की स्थिति भी आवश्यक है। देश में बड़ी संख्या में महिलाएं घरेलू कामों में की वजह से शिक्षा और रोजगार से दूर है। महिलाओं के सिर्फ ट्रेनिंग सेंटर नहीं खोलना बल्कि उन्हें घर और काम के बीच संतुलन बनाने वाली ट्रेनिंग, ट्रांसपोर्ट, काम करने के अवसर और वित्तीय सहायता देने की जरुरत है।
डिजिटल स्किल पासपोर्ट बनाने का दिया सुझाव
आयोग ने डिजिटल स्किल पासपोर्ट बनाने का दिया सुझाव का दिया है। इसमें किसी भी व्यक्ति/छात्र की शिक्षा, ट्रेनिंग, सर्टिफिकेशन और स्किल जैसी सारी जानकारियां डिजिटल रूप में मौजूद रहेंगी। इससे सिर्फ डिग्री ही नहीं अपितु व्यक्ति की स्किल देखकर उसको रोजगार देने में सहायता मिलेगी। आयोग ने सिर्फ नौकरी नहीं बल्कि रोजगार योग्य बनने पर जोर दिया है। भारत को विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल करने के लिए केवल डिग्री नहीं अपितु बदलते समय के साथ लगातार सीखने वाला वर्कफ़ोर्स बनना है।

