नेपाल। पड़ोसी देश नेपाल की मुश्किलें कंम होती नजर नही आ रही है। बाढ़ त्रासदी से लोग जुझ रहे है। इसी बीच गुरूवार को भूकंप की आई खबर ने हलचल पैदा कर दी है। जो जानकारी आ रही है उसके तहत नेपाल सीमा से करीब 55 किलोमीटर दूर तिब्बत में 5 तीव्रता का भूकंप आया। भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के जोशीमठ से करीब 128 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था और इसकी गहराई जमीन से 10 किलोमीटर नीचे थी।
1273 लोगो की अब तक मौत
यह भूकंप ऐसे समय आया है, जब 26 अगस्त को तिब्बत और नेपाल में आई बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई थी। इस आपदा में अब तक कुल 1273 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें नेपाल में 1252 और तिब्बत में 21 लोगों की जान गई है।
4 घंटे मलबे में दबी रही 97 साल की महिला
नेपाल में आई विनाशकारी रासुवा-भोटेकोशी फ्लैश फ्लड के बाद तबाही के बीच इंसानी जज्बे और चमत्कारिक बचाव की कई कहानियां सामने आ रही हैं। 97 वर्षीय गुना माया बोहरा ने तो मानों जीवन से जंग जीत लिया हो और उनके इस जीवन सघर्ष के जज्बे को हर कोई सलाम कर रहा है। बताया जा रहा है कि तकरीबन 4 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मलबे से उन्हे जिंदा निकाला गया।
देखभाल केंद्र में रह रही थी गुना माया
नेपाल नदी किनारे बने बुजुर्ग देखभाल केंद्र की ग्राउंड फ्लोर पर अपने कमरे में गुना माया थीं, तभी बाढ़ का पानी वहां पहुंच गया और उन्हें बहाकर एक ऐसे हिस्से तक ले गया, जहां पानी का बहाव कुछ कम था। उनके रिश्तेदार जेसीबी लेकर मौके पर पहुंचे और सेना-पुलिस की मदद से उन्हें बाहर निकाला गया। फिलहाल गुना माया का काठमांडू के बीर अस्पताल में इलाज चल रहा है। जब भी उनसे कोई कुछ पूछता है तो वे पूछती है कि पानी ने मुझे क्यों मारा?”
शवों की पहचान बड़ी चुनौती
इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 1,243 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि भोटेकोशी नदी के रास्ते और अंडरग्राउंड पावरहाउस की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश अभी जारी है। बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण उनकी पहचान करना भी चुनौती बन गया है। शवों की पहचान करने के लिए डीएनए जांच का सहारा लिया जा रहा है।
97 साल की महिला का जादुई रेस्क्यू
- मलबे में दबी रहीं: नेपाल के नुवाकोट (देविघाट) में एक ओल्ड एज केयर होम में रह रहीं गुना माया बोहरा बाढ़ और भूस्खलन के बाद मलबे में दब गई थीं।
- 4 घंटे का रेस्क्यू: नेपाल सेना और पुलिस ने भारी मलबे के बीच करीब 4 घंटे तक कड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।
- जेसीबी की बकेट में आईं नजर: जब उन्हें कीचड़ और मलबे से सुरक्षित निकाला गया, तो उन्हें JCB (एक्सकेवेटर) मशीन की बकेट (स्कूप) में बैठाकर अस्पताल ले जाया गया। उनकी यह तस्वीर पूरी दुनिया में ‘मानवीय जिजीविषा’ और उम्मीद का प्रतीक बन गई है।
- ‘एक योद्धा की तरह’: उनके परिजनों ने बताया कि जब वे मलबे से बाहर आईं, तो वे बिल्कुल किसी योद्धा (Warrior) की तरह लग रही थीं जो जंग जीतकर लौटी हो।
क्या वाकई भूकंप आया था?
- वैज्ञानिकों की रिपोर्ट: अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) और विशेषज्ञों के अनुसार, चीन-नेपाल सीमा के पास पहाड़ों में 5.2 तीव्रता की एक भूकंपीय हलचल (Seismic Event) दर्ज की गई थी।
- ग्लेशियर फटना वजह: वैज्ञानिकों का मानना है कि इस भूकंपीय ऊर्जा या हलचल की असली वजह तिब्बत-हिमालय सीमा क्षेत्र में एक विशाल ग्लेशियर का ढहना था। इसी ग्लेशियर के टूटने के कारण पहाड़ों में हलचल हुई और नीचे रसुवा-भोटेकोशी नदियों में प्रलयकारी ‘फ्लैश फ्लड’ (अचानक बाढ़) आ गई।

