सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के देवसर क्षेत्र में ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन परियोजना के निर्माण कार्य ने अब रफ्तार पकड़ ली है। रेलवे ट्रैक के रास्ते में आ रही जमीनों को खाली कराने के लिए प्रशासन ने रविवार से एक बड़ा अभियान शुरू किया है। भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे प्रशासनिक अमले ने जेसीबी और बुलडोजर की मदद से देवसर के कई गांवों में रेलवे मार्ग में आ रहे मकानों और अन्य निर्माणों को ढहाना शुरू कर दिया है। इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया है।
कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद कार्रवाई का आरोप, ग्रामीणों ने किया भारी विरोध
प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने मौके पर जमकर विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि यह पूरा मामला अभी न्यायालय में लंबित है, इसके बावजूद उनके आशियानों को तोड़ा जा रहा है। प्रभावित परिवारों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें बेघर तो किया जा रहा है, लेकिन अब तक उन्हें कोई मुआवजा राशि नहीं दी गई है। बिना किसी ठोस व्यवस्था के की जा रही इस कार्रवाई से कई परिवारों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है।
“वर्षों से रह रहे हैं, न मुआवजा मिला न पुनर्वास”: राशिद खान की अपील
ग्राम खोभा के निवासी राशिद खान ने प्रभावित परिवारों की तरफ से सिंगरौली कलेक्टर और देवसर एसडीएम से गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि कई गरीब परिवार पीढ़ियों से इन जमीनों पर मकान बनाकर रह रहे हैं। प्रशासन ने उन्हें बेदखल करने का नोटिस तो थमा दिया, लेकिन मुआवजे और उनके पुनर्वास को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक उनके मकानों को न तोड़ा जाए और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर आकर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनें।
राष्ट्रीय महत्व का प्रोजेक्ट, नियमों के तहत मिलेगा मुआवजा: एसडीएम
दूसरी ओर, देवसर के प्रभारी एसडीएम सुरेश झादव ने प्रशासनिक कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि ललितपुर-सिंगरौली रेलवे परियोजना एक राष्ट्रीय महत्व की योजना है। इसे समय पर पूरा करना बेहद जरूरी है, जिसके लिए पहले ही प्रभावितों को नोटिस जारी कर दिए गए थे। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा कि जिन भी लोगों के मुआवजे के प्रकरण लंबित हैं, उनकी फाइलें नियमानुसार प्रक्रिया में हैं। प्रशासन का पूरा प्रयास है कि प्रभावित लोगों की वैध समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए और विकास कार्य में कोई बाधा न आए।

