Religious significance of Suran : दिवाली पर क्यों बनाई जाती है सूरन की सब्जी, जानें धार्मिक-वैज्ञानिक व मौसमी कारण-दिवाली और सूरन का गहरा संबंध,भारत में हर त्योहार केवल आस्था का नहीं, बल्कि विज्ञान और जीवनशैली का भी प्रतीक रहा है। दीपावली के दिन सूरन (ओल या जिमीकंद) की सब्जी खाने की परंपरा भी ऐसी ही है, जिसमें स्वाद, स्वास्थ्य और श्रद्धा का सुंदर संगम देखने को मिलता है। दिवाली पर सूरन (जिमीकंद या ओल) की सब्जी खाने की परंपरा के पीछे धार्मिक, वैज्ञानिक और मौसमी तीनों कारण हैं। जानिए कैसे यह स्वादिष्ट व्यंजन न केवल परंपरा बल्कि सेहत और समृद्धि का प्रतीक भी है आखिर क्यों बनाई जाती है सूरन की सब्जी दीपावली के दूसरे दिन।
परंपरा और उसका तर्क – पुराने समय में सब्जियों के विकल्प सीमित हुआ करते थे। ऐसे में त्योहारों के अवसर पर खास पौष्टिक और मसालेदार व्यंजन बनाए जाते थे। जैसे आज पनीर या कचौरी आम हैं, वैसे पहले दीपावली पर सूरन की सब्जी विशेष महत्व रखती थी। हमारे बुज़ुर्ग बताते हैं कि हर परंपरा के पीछे एक कारण होता है, धार्मिक, वैज्ञानिक या मौसमी। लेकिन समय के साथ जब कारणों को समझना बंद हुआ, तो परंपराएं सिर्फ “ऐसा करना चाहिए” तक सीमित रह गईं।

सूरन (ओल) के गुण और स्वास्थ्य लाभ – सूरन शरीर के हर अंग के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इसमें फाइबर, विटामिन C, विटामिन B6, फोलिक एसिड, फॉस्फोरस, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को मजबूत और रोगमुक्त बनाए रखते हैं। यह बवासीर, गैस, कोलेस्ट्रॉल और यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव में सहायक माना जाता है। इसकी तासीर गर्म होती है, इसलिए ठंड के मौसम में इसका सेवन शरीर को प्राकृतिक रूप से गर्माहट और ऊर्जा प्रदान करता है ,दीपावली से सर्दी की शुरुआत होती है, ऐसे में सूरन का सेवन न सिर्फ परंपरा बल्कि मौसमी स्वास्थ्य का संकेत है , जो बताता है कि बदलते मौसम में खान-पान का ख्याल रखना जरूरी है।
धार्मिक दृष्टि से सूरन का महत्व – धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीपावली का पर्व भगवान श्रीराम के चौदह वर्ष के वनवास पूरा कर अयोध्या लौटने की स्मृति में मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान राम ने जिमीकंद (सूरन) जैसे कंद-मूल खाकर समय व्यतीत किया था। इसलिए दीपावली के दिन घरों में सूरन की सब्जी बनाना श्रद्धा, आस्था और स्मरण का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा, सूरन की एक विशेषता यह भी है कि यह कभी बोया नहीं जाता, इसकी छोटी-सी जड़ भी बड़े स्वरूप में फल देने लगती है। यही कारण है कि इसे समृद्धि और वृद्धि का प्रतीक माना गया है। इसी वजह से लक्ष्मी पूजा के दिन सूरन की सब्जी बनाना शुभ और मंगलकारी समझा जाता है, क्योंकि यह घर में धन, ऐश्वर्य व उन्नति का प्रतीक बनती है।

विशेष – हमारे पूर्वजों ने अपनी परंपराओं को केवल धार्मिक भावना तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उनमें विज्ञान, स्वास्थ्य और प्रकृति का समन्वय किया। दीपावली पर सूरन की सब्जी खाने की परंपरा इसका सुंदर उदाहरण है ,यह एक ऐसी प्रथा है जो स्वाद, सेहत, मौसम और समृद्धि चारों का संगम है। इस दीपावली, जब आप सूरन की सब्जी बनाएं या खाएं, तो इसे सिर्फ एक रीति नहीं, बल्कि पूर्वजों की वैज्ञानिक बुद्धिमत्ता और आस्था का उत्सव समझें। यह परंपरा हमें यह सिखाती है कि त्योहार केवल मनाने के लिए नहीं, बल्कि स्वस्थ, सजग और संतुलित जीवन जीने का माध्यम हैं।
