Religion Conversion Reservation : क्या धर्मांतरण के बाद पुराने धर्म में वापस जाने मिलेगा मिलेगा आरक्षण का लाभ? 

Religion Conversion Reservation : सुप्रीम कोर्ट ने अपने हाल के फैसले में साफ किया है कि यदि कोई अनुसूचित जाति का व्यक्ति धर्म बदलकर हिंदू, सिख, बौद्ध या किसी दूसरे धर्म को अपना लेता है, तो उसकी जाति का दर्जा खत्म हो जाएगा। अब सवाल ये है कि अगर कोई अनुसूचित जाति का व्यक्ति धर्म बदलकर अपने पुराने धर्म (हिंदू, सिख या बौद्ध) में वापस लौटता है, तो क्या उसकी जाति का दर्जा फिर से मिल सकता है? अगर हां, तो इसके लिए क्या नियम हैं?

क्या सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण पर क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति धर्म बदलकर फिर से अपने पुराने धर्म में लौटना चाहता है, तो उसे तीन जरूरी बातें साबित करनी होंगी:

1. उसे यह दिखाना होगा कि वह शुरुआत से उस जाति में था, जो संविधान के अनुसूचित जाति आदेश, 1950 में दी गई है। 
2. उसे यह भी साबित करना होगा कि उसने सच में अपने पुराने धर्म को अपना लिया है और उसकी जाति के रीति-रिवाज, पूजा-पाठ और परंपराएं निभा रहा है। 
3. साथ ही, उसे यह भी साबित करना होगा कि उसने जिस धर्म को छोड़ा था, उससे पूरी तरह से दूरी बना ली है। अब उससे पहले जैसी कोई संबंध नहीं है। 
4. इसके अलावा, उसे यह भी दिखाना होगा कि उसके समुदाय के लोग अब उसे अपने समूह का सदस्य मानते हैं और स्वीकार करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इन तीनों बातों का प्रमाण देना जरूरी है। अगर इनमें से कोई भी बात साबित नहीं होती, तो फिर उसका दावा मान्य नहीं माना जाएगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने किस मामले में सुनाया फैसला 

सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के रहने वाले और हिंदू से ईसाई बने चिंथडा आनंद की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया है। आनंद ने अपने ऊपर हुए हमले और जातिसूचक गालियों का केस दर्ज कराया था। इसके बाद आरोपी लोग यह कहकर कोर्ट गए थे कि आनंद ने धर्म बदल लिया है और अब वह ईसाई है।

हाई कोर्ट ने भी इन बातों को मानते हुए कहा था कि आनंद अब अनुसूचित जाति के नहीं हैं। इसके खिलाफ आनंद ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसने भी हाई कोर्ट का फैसला कायम रखा और कहा कि धर्म बदलने के बाद उनका जाति का दर्जा खत्म हो जाएगा।

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