भोपाल। कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद में घिरे मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी का मामला टल गया है। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा होनी थी और इसे पेश करने की पूरी तैयारी भी कर ली गई थी, लेकिन आखिरी वक्त पर इस प्रस्ताव को रोक दिया गया। इसके चलते बैठक में इस पर कोई विचार नहीं हो सका।
यह मामला कर्नल सोफ़िया कुरैशी को लेकर दिए गए विवादित बयान से जुड़ा है। मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिन्दूर के बाद 11 मई 2025 को महू में आयोजित एक कार्यक्रम में कर्नल सोफ़िया कुरैशी पर एक विवादित टिप्पणी किए थें। जिसके बाद देश भर में उनको आलोचना का सामना करना पड़ा। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। पिछले एक साल से लंबित इस मामले में आज कैबिनेट बैठक में फैसला लिया जाना था।
जाने क्या है पूरा मामला
मामला जनजातीय कार्य विभाग मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफ़िया कुरैशी पर दिए विवादित बयान से जुड़ा है। मामले की जांच कर रही एसआइटी ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता बीएनएस की धारा 196(1)(ंएं) धर्म, जाति,जन्म स्थान या भाषा के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना, के तहत मुकदमा चलाने के लिए राज्य सरकार से अभियोजन की अनुमति मांगी थी। विजय शाह वर्तमान में कैबिनेट मंत्री है इसलिए उनके खिलाफ मुकदमा चलने के लिए कैबिनेट की मंजूरी आवश्यक है। उसके बाद राज्यपाल की अनुमति अनिवार्य है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद क्या होगा
राज्यपाल के पास जाएगी फाइलः यदि कैबिनेट बैठक में विजय शाह अभियोजन प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो उसके बाद राज्यपाल की मंजूरी के लिए फाइल भेजी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा; राज्यपाल की मंजूरी के बाद गृह विभाग सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कोर्ट को सूचित करेगा कि सरकार ने अभियोजन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जिसके बाद ही निचली अदालत में आपराधिक मुकदमा शुरू हो सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने दे रखी है डेट लाइन
यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। 19 जनवरी 2026 की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को फैसला लेने के लिए 2 हफ्ते का समय दिया था। इसके बाद भी मामला लंबित रहा। राज्य सरकार द्वारा अभियोजन की मंजूरी में हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए 31 अगस्त तक का अल्टीमेटम एमपी सरकार को दिया था। सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद मोहन यादव सरकार ने मामले को कैबिनेट ऐजेंडे में शामिल किया है। इस धारा में विभिन्न धर्म, जाति,जन्म स्थान या भाषा के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा या असमानता फैलाने के लिए तीन साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

