Reliance Power fake Bank Guarantee Case : हमारे देश की सबसे बड़ी नामी ऊर्जा कंपनी रिलायंस पावर एक पर फिर से चर्चा के विषय में है हाल ही में एनफोर्समेंट डेकोरेट नहीं कोलकाता की एक कंसलटेंट अमरनाथ दत्त को गिरफ्तार कर लिया है उन पर ऐसा आरोप है कि उन्होंने रिलायंस पावर की सहायक कंपनी रिलायंस अन्य यू बेस्ट लिमिटेड से जुड़ी एक फर्जी बैंक गारंटी तैयार कर उसे सोलर एनर्जी कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया को सौंप दिया है।
ED के मुताबिक, यह बैंक गारंटी करीब 68 करोड रुपए की थी जिसे जाली साबित कर दिया गया है जांच एजेंसी का कहना है कि इस धोखाधड़ी से SECI को कम से कम 100 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो गया है।
कंपनी का बयान – “हम पीड़ित हैं, आरोपी नहीं”
रिलायंस पावर इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए साफ तौर पर कहां है, कि अमरनाथ दत्ता का कंपनी या उसका किसी भी यूनिट से कोई संबंध नहीं है।
कंपनी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह धोखाधड़ी का शिकार है ना कि उसका हिस्सा है। उनका कहना है कि कुछ बाहरी लोगों ने कंपनी के नाम का दुरुपयोग करके उसके फर्जी दस्तावेज बनाए और बैंक की गारंटी तैयार की है। कंपनी का यह भी कहना है कि उसके पूरे प्रकरण का उनके वित्तीय प्रदर्शन या कारोबार के गतिविधि पर कोई भी असर नहीं पड़ेगा।
शेयर बाजार में असर
जैसे ही यह खबर सामने आई रिलायंस पावर के शेयर में गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार को कंपनी का शेयर करें 4.5% तक टूट चुका है हालांकि कंपनी के स्पष्ट कारण देने के बाद बाजार में थोड़ी स्थिरता का माहौल तो देखने को मिला है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक एड की जांच पूरी नहीं हो जाती है तब तक निवेश करने वाले लोगों को निवेश करने से बचना चाहिए।
ED की जांच और अब तक की कार्रवाई
जांच एजेंसी का कहना है कि इस मामले में पहले से दो लोगों को अभी तक गिरफ्तार कर लिया गया है पहले का नाम अशोक कुमार पाल पूर्व सीएफओ रिलायंस लिमिटेड और दूसरे का नाम पथ साल थी विशाल निर्देशक विश्वास ट्रेड लिंक प्राइवेट लिमिटेड।
अब तीसरी गिरफ्तारी अमरनाथ दत्त की होने वाली है जो कथित रूप से जाली बैंक गारंटी करने में शामिल व्यक्ति है।
Reliance Power Fake Bank Guarantee Case मैं एक बार फिर कॉरपोरेट गवर्नेंस और सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं हालांकि कंपनी ने खुद को निर्दोष बताया है लेकिन जांच पूरी होने तक यह कहना मुश्किल है की असली दोषी कौन है। फिलहाल निवेश करने वाले लोगों और बाजार में दोनों की निगाह है जांच एजेंसी की कार्यवाही पर टिकी हुई है। अगर कंपनी अपने दावे को साबित कर देती है तो उसका भरोसा और ब्रांड इमेज दोनों बहुत मजबूत होगा।

