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RBI की Rupee Strategy, 1997 और 2013 से सबक लेकर बना नया ब्रह्मास्त्र प्लान

RBI Rupee Strategy: New plan based on lessons from 1997 and 2013RBI Rupee Strategy: New plan based on lessons from 1997 and 2013

RBI Rupee Strategy: New plan based on lessons from 1997 and 2013

Rupee Strategy: भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में रुपए पर बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने के लिए एक प्लानिंग के तहत कदम उठाया है। डॉलर के मुकाबले रुपए में उतार-चढ़ाव वैश्विक आर्थिक क्षेत्र में अनिश्चित का माहौल और विदेशी निवेश निकासी के बीच यह कदम उठाए गए हैं। जिसका असर मुद्रा बाजार निवेश करने वाले लोगों की धारणा पर पड़ता देखा जा सकता है।

Forex Management में RBI की भूमिका

RBI ने अपनी Rupee Strategy के अनुसार विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करते हुए बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ाई है। स्टॉक एक्सचेंज डाटा के अनुसार ये कदम रुपए की तेज गिरावट को रोकने और बाजार में स्थिरता को बनाए रखने के लिए उठाया गया है। इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने भी लिक्विडिटी को नियंत्रित करने के उपाय भी किए हैं। जिससे सैट बाजी को भी सीमित किया जा सके ये एक प्रकार का संतुलित हस्तछेप है जो बाजार में अनावश्यक स्थिरता को रोकने में मदद करता है।

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2013 Taper Tantrum से मिली है क्या सीख

साल 2013 के टेपर तंत्रम के दौरान भारत को गंभीर मुद्रा संकट का सामना करना पड़ा था। उसे समय आरबीआई ने एफसीएनआर बी डिपॉजिट स्कीम के जरिए लगभग 34 अरब डॉलर जुटाए थे। बाजार विश्लेषकों के अनुसार इस अनुभव से यह स्पष्ट होता है किसी संकट के समय तेज और निर्णायक कदम उठाना जरूरी है। मौजूदा Rupee Strategy मैं भी वही दृष्टिकोण देखने को मिलता है जहां आरबीआई पहले से सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

1997 Asian Crisis से नियंत्रण की प्लानिंग

एशियाई वित्तीय संकट 1997 के दौरान भारत अपेक्षाकृत सुरक्षित रहा था। इसका मुख्य कारण सीमित पूंजी खाता और नियंत्रित विदेशी कर्ज ही था। कंपनी के ऑफिशियल बयान जैसे किसी डॉक्यूमेंट की तरह आरबीआई की प्लानिंग भी सिद्धांत पर ही आधारित है कि अत्यधिक वैश्विक निर्भरता रिस्क बढ़ा सकती है। वर्तमान में भी आरबीआई इसी संतुलन को बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

निवेशकों और बाजार पर क्या प्रभाव

Rupee Strategy का सीधा असर विदेशी निवेशक और घरेलू निवेशक दोनों पैर पड़ता है। हाल ही के कुछ सालों में sip और घरेलू निवेश में बढ़ोतरी होने से बाजार को एक्स्ट्रा मजबूती मिली है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार अगर विदेशी निवेशक निकासी करते हैं तब भी घरेलू निवेशक बाजार को स्थिरता दे कर सकते हैं। इससे रुपए पर दबाव सीमित रहता है।

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क्या है आगे का आउटलुक

आगे की दिशा काफी हद तक वैश्विक कारक जैसे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की प्लानिंग कच्चे तेल की कीमत और भू राजनीतिक तनाव पर ही निर्भर करती है। हालांकि मौजूदा Rupee Strategy यह संकेत देती है कि आरबीआई अब केवल रिएक्शन नहीं देता बल्कि संभावित जोखिम की पहले तैयारी करता है ये निवेश करने वाले लोगों के लिए पॉजिटिव संकेत है। हमारे द्वारा दी जाने वाली जानकारी शोध पर आधारित ऐसे किसी भी प्रकार की निवेश सलाह ना समझे।

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