Gurmeet Ram Rahim Singh Parole: डेरे का मुखिया गुरमीत राम रहीम सिंह (Gurmeet Ram Rahim Singh), जो दो शिष्याओं के बलात्कार (Rape) के लिए 20 साल और पत्रकार की हत्या (Murder) के लिए उम्रकैद की सजा काट रहा है, को एक बार फिर 40 दिन की पैरोल मिल गई है। हरियाणा के रोहतक (Rohtak) की सुनारिया जेल (Sunaria Jail) में बंद राम रहीम को 3 जनवरी 2026 को यह पैरोल मंजूर हुई। यह 2017 में सजा के बाद उसकी 15वीं रिहाई है। पैरोल के दौरान वह सिरसा (Sirsa) स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय में रहेगा।
पैरोल की मंजूरी रोहतक डिविजनल कमिश्नर ने दी। राम रहीम पर शर्तें लगी हैं कि वह डेरा परिसर से बाहर कोई कार्यक्रम नहीं करेगा और पुलिस उसकी गतिविधियों पर नजर रखेगी। सिख संगठनों और विपक्षी दलों ने इस फैसले की आलोचना की है, इसे “राजनीतिक पक्षपात” बताया जा रहा है।
राम रहीम को 2017 में बलात्कार के दो मामलों में 20 साल की सजा मिली थी। 2019 में पत्रकार रामचंदर छत्रपति की हत्या के मामले में उम्रकैद हुई। डेरा सच्चा सौदा के लाखों अनुयायी हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में हैं, जिस वजह से उनकी पैरोल को अक्सर राजनीतिक नजरिए से देखा जाता है।
राम रहीम को कब-कब और कितने दिनों की पैरोल मिली
When and for how many days did Ram Rahim get parole
| क्रम | तारीख / महीना | अवधि | कारण / टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| 1 | 24 अक्टूबर 2020 | 1 दिन | मां से मिलने |
| 2 | 21 मई 2021 | 12 घंटे | मां से मिलने |
| 3 | फरवरी 2022 | 21 दिन | पारिवारिक कारण |
| 4 | जून 2022 | 30 दिन | डेरा आश्रम में रहने की अनुमति |
| 5 | 14 अक्टूबर 2022 | 40 दिन | धार्मिक गतिविधियां |
| 6 | 21 जनवरी 2023 | 40 दिन | डेरा कार्यक्रम |
| 7 | 20 जुलाई 2023 | 30 दिन | फरलो |
| 8 | 20 नवंबर 2023 | 21 दिन | फरलो |
| 9 | 19 जनवरी 2024 | 50 दिन | अब तक की सबसे लंबी फरलो |
| 10 | 2 अक्टूबर 2024 | 20 दिन | चुनावी समय |
| 11 | 28 जनवरी 2025 | 30 दिन | चुनाव से पहले |
| 12 | 9 अप्रैल 2025 | 21 दिन | फरलो |
| 13 | 5 अगस्त 2025 | 40 दिन | जन्मदिन के आसपास |
| 14 | जनवरी 2026 | 40 दिन | 15वीं बार अस्थायी रिहाई |
2017 की सजा के बाद से अब तक राम रहीम 366 दिन जेल से बाहर रह चुका है। इस नई 40 दिन की पैरोल के साथ कुल 406 दिन हो जाएंगे – यानी एक साल से ज्यादा समय जेल के बाहर। 2020 से अब तक अकेले 330+ दिन बाहर रहा।
यह बार-बार पैरोल मिलने पर सिख संगठन जैसे SGPC और विपक्षी दल सवाल उठाते रहे हैं। हरियाणा सरकार इसे “गुड कंडक्ट” का हवाला देकर जस्टिफाई करती है। अब देखना यह है कि इस पैरोल के दौरान क्या नया विवाद होता है।
