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5 साल में 436 जेल से बाहर रहा बलात्कारी राम रहीम! 16 बार पेरोल मिली

Ram Rahim Parole Days: बलात्कार और हत्या के मामलों में सजा काट रहा डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह (Gurmeet Ram Rahim Singh) एक बार फिर जेल से बाहर आ गया है। हरियाणा सरकार ने राम रहीम को 30 दिन की पैरोल (Ram Rahim Parole) मंजूर की है।

सोमवार सुबह करीब 6:30 बजे राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर निकला। जेल से बाहर आते ही पंजाब और हरियाणा पुलिस ने उसे भारी सुरक्षा घेरे में लिया और बड़े काफिले के साथ सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय ले जाया गया। पैरोल के दौरान वह वहीं रहेगा।

2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद यह 16वीं बार है जब राम रहीम जेल से बाहर आया है। इस बार की पैरोल के बाद एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर दो रेप और दो हत्या मामलों में दोषी व्यक्ति को इतनी बार पैरोल कैसे मिल जाती है।

5 साल में 436 दिन जेल से बाहर

राम रहीम को पिछले पांच सालों में कई बार पैरोल और फरलो मिल चुकी है।

अब तक वह करीब 406 दिन जेल से बाहर रह चुका था। इस नई पैरोल के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 436 दिन हो जाएगा। यानी सजा के दौरान वह एक साल से ज्यादा समय जेल से बाहर बिता चुका है।

किन मामलों में दोषी है राम रहीम?

गुरमीत राम रहीम सिंह को अगस्त 2017 में CBI कोर्ट ने उसके ही आश्रम की दो महिला अनुयायियों से बलात्कार का दोषी ठहराया था। कोर्ट ने उसे 20 साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद 2019 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में भी उसे दोषी करार दिया गया। वहीं 2002 में डेरा के पूर्व मैनेजर रणजीत सिंह हत्या मामले में भी राम रहीम को उम्रकैद की सजा मिली। इन मामलों के बाद से वह रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है।

चुनावों के समय पैरोल पर सवाल

राम रहीम को मिलने वाली पैरोल को लेकर पहले भी कई बार विवाद हो चुका है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि उसे अक्सर चुनावों के आसपास जेल से बाहर भेजा जाता है।

हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और दिल्ली के कई इलाकों में डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों की बड़ी संख्या मानी जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डेरा समर्थकों का वोट कई सीटों पर असर डाल सकता है।

इसी वजह से हर बार पैरोल मिलने पर राजनीतिक विवाद शुरू हो जाता है।

क्या है पैरोल और फरलो?

भारतीय जेल नियमों के मुताबिक अच्छे व्यवहार, पारिवारिक कारणों या विशेष परिस्थितियों में कैदियों को सीमित समय के लिए पैरोल या फरलो दी जा सकती है।

हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर अपराधों में दोषी कैदियों को बार-बार राहत दिए जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

सोशल मीडिया पर फिर बहस

राम रहीम की रिहाई के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि आम कैदियों को जहां पैरोल के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, वहीं राम रहीम को लगातार राहत मिलती रहती है। कुछ लोगों ने इसे “VIP ट्रीटमेंट” बताया, जबकि समर्थकों का कहना है कि उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत ही पैरोल दी जाती है।

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