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रामजन्मोत्सवः विंध्य क्षेत्र से भगवान राम का है गहरा रिश्ता, किए थें शक्ति की साधना

रामनवमी। भगवान राम का जन्म चैत्र की 9वीं तिथी को अयोध्या में हुआ था। इस वर्ष 27 मार्च को रामनवमी यानि की रामजन्मोत्सव का पर्व मनाया जा रहा है। दोपहर 12 बजते ही मठ-मंदिरों के द्वार खुल जाऐगे और शंख ध्वनि के साथ रामलला का जन्म उत्सव मनाया जाएगा। अयोध्या धाम के साथ ही विंध्य क्षेत्र में राम जन्म उत्सव की धूम है, क्योकि विंध्य क्षेत्र से भगवान राम का गहरा रिश्ता जो है।

किये थे शक्ति की साधना

भगवान राम ने विंध्य में शक्ति की साधना किए थें। जानकारों का कहना है कि भगवान का विंध्य क्षेत्र से आध्यात्मिक और पौराणिक रिश्ता है। वे जब 14 साल के वनवास पर निकले तो विंध्य क्षेत्र को ही अपना स्थान बनाए और वनवास के दौरान लगभग 11 वर्ष चित्रकूट में बिताए। विंध्य पर्वतों के बीच स्थित चित्रकूट ऋषियों की तपोभूमि रही है, जहाँ उन्होंने शक्ति की साधना की थी। इतना ही नही भगवान लक्ष्मण को यह क्षेत्र राज्यपाठ के लिए सौपा गया था तो वही कुशावती नगरी जो विंध्य अंचल में थी, राम के पुत्र कुश की राजधानी मानी जाती है।

विंध्य से भगवान राम के रिश्ते के प्रमुख बिंदु

वनवास का लंबा समयः मर्यादा पुरुषोत्तम राम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष के वनवास में से 11 वर्ष विंध्य पर्वतों से घिरे चित्रकूट में रहे, जिसे ’आश्चर्यों की पहाड़ी’ कहा जाता है।
शक्ति साधनाः भगवान राम ने विंध्य क्षेत्र में भगवती को प्रसन्न करने के लिए साधना की थी, क्योंकि यह स्थान शक्ति का केंद्र माना जाता है।
कुशावती नगरीः विंध्याचल के अंचल में कुशावती नगरी बसी थी, जहाँ कुश का राज्याभिषेक हुआ था।
विंध्यवासिनी देवीः विंध्याचल क्षेत्र में मां विंध्यवासिनी विराजमान हैं, जो 51 शक्तिपीठों में से एक हैं।
पौराणिक संबंधः विंध्य पर्वत पर ही माँ दुर्गा के तीन रूपों- महालक्ष्मी, महासरस्वती, महाकाली का वास है, जहाँ राम ने पूजा की थी

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