Pandit Pradip Mishra Katha Scam: राजनांदगांव में 8 मई को प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा शिवपुराण कथा (Shivpuran Katha) कहने आने वाले थे, जहां मंच पूरी तरह सजाया जा चुका था और भोलेनाथ सेवा समिति ने आयोजन की सारी तैयारियां कर ली थीं। लेकिन निर्धारित समय पर न तो पंडित जी पहुंचे और न ही उनका कोई प्रतिनिधि। जब समिति के सदस्य पुष्टि के लिए पंडित प्रदीप मिश्रा के मुख्यालय सीहोर (Sehore) पहुंचे, तब जाकर उन्हें चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि कथा के नाम पर उनसे 21 लाख रुपये की ठगी (Cheating) कर ली गई है।
Pandit Pradip Mishra Katha Scam: आस्था और भक्ति के नाम पर बड़े स्तर पर धोखाधड़ी (Fraud) का मामला सामने आया है। प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की शिवपुराण कथा (Shivpuran Katha) आयोजित करने का झांसा देकर एक व्यक्ति ने भोलेनाथ सेवा समिति (Bholenath Seva Samiti) से 21 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी (Cheating) का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
फर्जी बुकिंग का दावा कर लिया भरोसा
छुरिया थाना क्षेत्र के हालेकोसा गांव निवासी दिनेश साहू ने समिति के सदस्यों को विश्वास दिलाया कि पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा की बुकिंग उसी के माध्यम से होती है। आरोपी ने फर्जी तारीख बताकर समिति से पूरे कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार भी करवा लिया। योजना के मुताबिक कथा 8 मई से 14 मई 2026 तक आयोजित होनी थी। समिति ने इसकी पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन कार्यक्रम शुरू होने तक न तो कथावाचक पहुंचे और न ही कोई प्रतिनिधि।
सीहोर पहुंचने पर खुलासा, फिर लगाई गुहार
जब समिति के सदस्य पंडित प्रदीप मिश्रा के मुख्यालय सीहोर (मध्य प्रदेश) पहुंचे तो वहां सच्चाई सामने आ गई। वहां किसी प्रकार की बुकिंग (Booking) नहीं हुई थी। इसके बाद पीड़ित सदस्य सीधे राजनांदगांव एसपी (SP) के पास पहुंचे और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तथा राशि वापसी की मांग की।
दो किस्तों में दी गई 21 लाख की रकम
पीड़ितों ने बताया कि दिनेश साहू ने रसीद न देने की शर्त पर नकद राशि मांगी थी। समिति ने आरोपी पर भरोसा करते हुए 24 फरवरी 2026 को 5 लाख रुपये और 11 मार्च 2026 को 16 लाख रुपये सौंप दिए। कुल मिलाकर 21 लाख रुपये (21 Lakh Rupees) की ठगी हुई है।
पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
छुरिया थाना पुलिस ने आरोपी दिनेश साहू के खिलाफ धोखाधड़ी (Fraud Case) का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा और जांच में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। यह मामला आस्था के व्यापारीकरण (Commercialization of Faith) और धार्मिक आयोजनों में फर्जी बुकिंग (Fake Booking) की बढ़ती प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है।

