Railway Biodegradable Thali: भारतीय रेलवे अब यात्रियों को न केवल तेज़ और सुरक्षित यात्रा ही प्रदान कर रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। आईआरसीटीसी ने पर्यावरण-अनुकूल पहल के तहत वंदे भारत, शताब्दी और बेंगलुरु राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों में भोजन परोसने के लिए एल्यूमिनियम फॉयल की जगह पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल थालियों का उपयोग शुरू करने का फैसला किया है।
Railway Biodegradable Thali: भारतीय रेलवे अब यात्रियों को तेज और सुरक्षित यात्रा के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी वाली सेवा प्रदान करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आईआरसीटीसी ने प्रीमियम ट्रेनों में भोजन परोसने के लिए एल्युमिनियम फॉयल की जगह पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल थालियों का इस्तेमाल शुरू करने का फैसला किया है। शुरुआत में यह बदलाव वंदे भारत, शताब्दी और बेंगलुरु राजधानी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में लागू होगा।
इन ट्रेनों में हर महीने हजारों थालियां बचेंगी
इस नई व्यवस्था से सिर्फ इन चुनिंदा ट्रेनों में ही मासिक स्तर पर लगभग 50 हजार एल्युमिनियम थालियों का उपयोग बंद हो जाएगा। साथ ही, 300 किलोग्राम से ज्यादा प्लास्टिक कचरा कम होने की उम्मीद है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह कदम न केवल कार्बन उत्सर्जन को घटाएगा, बल्कि ट्रेनों और स्टेशनों को प्लास्टिक-मुक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
भोपाल मंडल से होगी शुरुआत, बाद में विस्तार
यह प्रयोग सबसे पहले भोपाल रेल मंडल से जुड़ी प्रीमियम ट्रेनों में शुरू किया जाएगा। सफल होने पर इसे अन्य मंडलों और लंबी दूरी की ट्रेनों तक फैलाया जाएगा। भोपाल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि यह पहल रेलवे की पर्यावरण संरक्षण नीति का हिस्सा है।
फल-सब्जियों के छिलकों से बनेंगी नई थालियां
आईआरसीटीसी के अधिकारियों के अनुसार, ये नई थालियां फल और सब्जियों के छिलकों, कागज तथा अन्य प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार की जाएंगी। इस्तेमाल के बाद ये थालियां महज 3 से 6 महीनों में पूरी तरह से मिट्टी में विलीन हो जाएंगी। इसके उलट, प्लास्टिक या एल्युमिनियम सामग्री को विघटित होने में सदियां लग जाती हैं।
बायोडिग्रेडेबल थालियां न तो माइक्रोप्लास्टिक उत्पन्न करती हैं और न ही कोई जहरीला रसायन छोड़ती हैं। इनके उत्पादन और निपटान में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन भी काफी कम होता है, जो पर्यावरण पर दबाव को घटाने में मदद करेगा।
यात्रियों को मिलेगा ज्यादा स्वच्छ और सुरक्षित भोजन
गर्म भोजन परोसते समय अब प्लास्टिक या एल्युमिनियम से निकलने वाले हानिकारक रसायनों का खतरा नहीं रहेगा। इससे यात्रियों को न सिर्फ स्वच्छ, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से ज्यादा सुरक्षित भोजन उपलब्ध होगा। रेलवे को उम्मीद है कि इस बदलाव से लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।
मार्च से लागू होगी योजना
टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह नई व्यवस्था मार्च महीने से औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी। पिछले डेढ़ साल से विभिन्न स्तरों पर इसका परीक्षण चल रहा है। भविष्य में एल्युमिनियम और बायोडिग्रेडेबल सामग्री का संतुलित उपयोग करने पर भी विचार किया जा रहा है।
प्लास्टिक के खिलाफ पहले से चल रहे प्रयास
रेलवे ने पहले ही प्लास्टिक कप और कैरी बैग्स पर रोक लगाकर कागज आधारित विकल्प अपनाए हैं। अब बायोडिग्रेडेबल थालियों को जोड़कर इस मुहिम को और मजबूती मिलेगी। आईआरसीटीसी ने जन आहार आउटलेट्स और फूड प्लाजा संचालकों को भी पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग अपनाने के सख्त निर्देश दिए हैं।
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