How many foreign trips did Rahul Gandhi make in the year 2025: कांग्रेस के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) एक बार फिर सुर्खियों में हैं, इस बार उनके “गुप्त” विदेश यात्राओं (Rahul Gandhi Secret Foreign Trips) के लिए। 10 दिसंबर 2025 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी ने पार्लियामेंट सेशन (Rahul Gandhi traveled to Germany during the Parliament session)के बीच में जर्मनी (Rahul Gandhi Germany) की यात्रा की, जहां वे “वैकेशन” एंजॉय कर रहे थे, जबकि देश में विपक्ष की “ज़िम्मेदारी” उन्हें बुला रही थी।
राहुल गांधी की “गुप्त” विदेश यात्राओं का इतिहास
राहुल गांधी की विदेश यात्राओं का इतिहास लंबा और “रहस्यमयी” (Mysterious) है। आइए कुछ प्रमुख मौकों पर नजर डालें, जब वे पार्लियामेंट सेशन के बीच “गायब” हो गए:
- 2014 में श्रीलंका यात्रा: जब लोकसभा में बजट डिबेट चल रही थी, राहुल गांधी श्रीलंका में “रिलैक्स” कर रहे थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, वे 5 दिन के लिए “गायब” रहे।
- 2018 में इटली यात्रा: जब राज्यों में चुनाव चल रहे थे, राहुल गांधी इटली में “फैमिली टाइम” एंजॉय कर रहे थे। इस बार वे 7 दिन के लिए “गायब” रहे।
- 2022 में थाईलैंड यात्रा: जब संसद में कृषि बिल पर बहस हो रही थी, राहुल गांधी थाईलैंड में “मेडिटेशन” कर रहे थे। इस बार वे 10 दिन के लिए “गायब” रहे।
- 2025 में जर्मनी यात्रा: और अब, जब पार्लियामेंट का विंटर सेशन (Winter Session) चल रहा है, राहुल गांधी जर्मनी में “वैकेशन” एंजॉय कर रहे हैं।
विंटर सेशन छोड़कर LOP के अचानक से जर्मनी जाने पर उनकी पार्टी ने बचाव शुरू कर दिया है. प्रियंका गांधी जैसी नेता तर्क देती हैं कि पीएम मोदी भी तो विदेश जाते हैं. देखा जाए तो पीएम मोदी की विदेश यात्राओं और राहुल गाँधी की फॉरेन ट्रिप्स में जमीन आसमान का अंतर होता है।
- मोदी की विदेश यात्राएं: मोदी जी की विदेश यात्राएं “डिप्लोमैटिक” और “स्ट्रैटेजिक” होती हैं। वे G20, BRICS, और अन्य इंटरनेशनल फोरम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी यात्राओं का मकसद भारत के हित (India’s Interests) को बढ़ाना होता है।
- राहुल की “गुप्त” यात्राएं: राहुल गांधी की यात्राएं “वैकेशन” और “फैमिली टाइम” के लिए होती हैं। वे पार्लियामेंट सेशन के बीच “गायब” हो जाते हैं, और बाद में “ज़िम्मेदारी” का रोना रोते हैं।
विपक्ष के नेता होने के नाते, राहुल गांधी की “ज़िम्मेदारी” है कि वे पार्लियामेंट में मौजूद रहें और सरकार को घेरें। लेकिन, जब वे “गायब” हो जाते हैं, तो विपक्ष की “ज़िम्मेदारी” कौन निभाएगा? क्या यह “गुप्त” यात्राएं उनकी “ज़िम्मेदारी” से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं?
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