Putin India Visit Date : पुतिन दिसंबर में आएंगे भारत, पहले SCO Summit में होगी मुलाकात

Putin India Visit Date/ Modi Putin SCO Summit Meeting: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) दिसंबर 2025 में भारत का दौरा करेंगे, जिसकी पुष्टि क्रेमलिन ने 29 अगस्त 2025 को की। यह 2022 में यूक्रेन युद्ध (Ukraine War) शुरू होने के बाद पुतिन का पहला भारत दौरा होगा। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब भारत और रूस अपनी रणनीतिक साझेदारी (India Russia Strategic Partnership) को मजबूत कर रहे हैं, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने भारत के रूसी तेल आयात के कारण 50% टैरिफ लगाए हैं। पुतिन 31 अगस्त को तियानजिन, चीन में शंघाई सहयोग संगठन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से मुलाकात करेंगे, जहां इस दौरे की तैयारियों पर चर्चा होगी। इस लेख में पुतिन की भारत यात्रा, भारत-रूस संबंध, और अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव का विश्लेषण किया गया है।

पुतिन भारत कब आएँगे

क्रेमलिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव (Yuri Ushakov) ने बताया कि पुतिन दिसंबर में भारत में 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन (India-Russia Summit) के लिए आएंगे। इससे पहले, 31 अगस्त को SCO समिट में पुतिन और मोदी इस दौरे की तैयारियों पर चर्चा करेंगे। पुतिन की आखिरी भारत यात्रा 6 दिसंबर 2021 को थी, जब उन्होंने दिल्ली में मोदी से मुलाकात की और 28 समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिसमें सैन्य और तकनीकी सहयोग शामिल थे। यह यात्रा यूक्रेन युद्ध शुरू होने से पहले की थी. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल (Ajit Doval) ने 7 अगस्त 2025 को मॉस्को में पुतिन और रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु (Sergei Shoigu) से मुलाकात कर इस दौरे की नींव रखी। डोभाल ने भारत-रूस संबंध को “विशेष और विशिष्ट” बताया।

भारत से रूस के संबंध

India Russia Trade: भारत और रूस की साझेदारी सोवियत काल से चली आ रही है। रूस भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता (Arms Supplier) है, और दोनों देशों ने 2025 तक $30 बिलियन और 2030 तक $100 बिलियन का द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) लक्ष्य रखा है। वर्तमान में व्यापार $60 बिलियन है.

यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने अपने तेल निर्यात को यूरोप से भारत और चीन की ओर मोड़ लिया। भारत प्रतिदिन 1.5 मिलियन बैरल रूसी तेल आयात करता है, जो इसकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा है। भारत का तर्क है कि यूरोप को पारंपरिक आपूर्ति (Traditional Supplies) मोड़ने के कारण उसने रूस से तेल खरीदा।

पुतिन की दिसंबर 2025 की भारत यात्रा और SCO समिट में मोदी के साथ उनकी मुलाकात भारत-रूस संबंधों को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह दौरा अमेरिकी प्रशासन के टैरिफ दबाव के बीच हो रहा है, जो भारत के रूसी तेल आयात को लक्षित करता है। दूसरी ओर, भारत-चीन संबंधों में SCO समिट एक सकारात्मक कदम है, लेकिन अक्साई चिन (38,000 वर्ग किलोमीटर) और शक्सगाम घाटी (5,180 वर्ग किलोमीटर) जैसे क्षेत्रों पर चीन का कब्जा एक जटिल मुद्दा बना हुआ है। चीन के रणनीतिक हितों को देखते हुए पूर्ण जमीन वापसी की संभावना कम है, लेकिन कूटनीतिक वार्ता से LAC पर छोटे समझौते संभव हैं। भारत अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए रूस और चीन के साथ संतुलित कूटनीति (Balanced Diplomacy) पर ध्यान दे रहा है।

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