Pune Municipal Corporation Election 2026 के नतीजों ने महाराष्ट्र की सियासत में एक नया अध्याय लिख दिया है। पुणे (PMC) और पिंपरी-चिंचवड़ (PCMC) नगर निगम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए विपक्षी गठबंधन को करारी शिकस्त दी है। शरद पवार और अजीत पवार के साथ आने के बावजूद महायुति का यह किला अभेद्य रहा, जिसने भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है।
महाराष्ट्र के ‘सत्ता के सेमीफाइनल’ माने जा रहे पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों के परिणाम स्पष्ट हो चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पुणे नगर निगम की 165 सीटों में से 110 पर बढ़त बनाकर अपनी सत्ता बरकरार रखी है। वहीं, पिंपरी-चिंचवड़ में भी 128 सीटों में से 81 पर जीत हासिल कर पार्टी ने विरोधियों को पछाड़ दिया है।
पवार एकता का प्रयोग रहा विफल
इस चुनाव की सबसे बड़ी चर्चा शरद पवार और अजीत पवार के गुटों का एक साथ आना था। विपक्षी खेमे को उम्मीद थी कि दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के एकजुट होने से मराठा वोट बैंक और क्षेत्रीय प्रभाव BJP को कड़ी टक्कर देगा। हालांकि, नतीजों ने साफ कर दिया कि मतदाताओं ने इस ‘यूनिटी प्रोजेक्ट’ के बजाय BJP के विकास एजेंडे पर भरोसा जताया है।

BJP की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ रणनीति
BJP की इस एकतरफा जीत के पीछे एक सोची-समझी रणनीति रही। पार्टी ने चुनाव से पहले ही विपक्षी दलों के कई कद्दावर चेहरों को अपने पाले में शामिल किया था।
इसमें बापू पठारे के परिवार से लेकर कांग्रेस और NCP के पूर्व नगरसेवकों तक की लंबी फेहरिस्त शामिल थी। इसके अलावा, मौजूदा विधायकों के रिश्तेदारों को टिकट न देने के सख्त फैसले ने कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा।
अपराध और विकास का मुद्दा
चुनाव प्रचार के दौरान BJP ने आक्रामक रुख अपनाते हुए विपक्षी गठबंधन द्वारा ‘दागी’ उम्मीदवारों को मैदान में उतारने पर कड़ा प्रहार किया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने पुणे के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, जैसे मेट्रो विस्तार और रिवरफ्रंट डेवलपमेंट को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया, जिसे शहरी मध्यम वर्ग का भरपूर समर्थन मिला।
Pune Municipal Corporation Election 2026: आंकड़ों में BJP का दबदबा
पुणे नगर निगम (PMC) में बहुमत के लिए 83 सीटों की आवश्यकता थी, लेकिन BJP ने इस आंकड़े को पार करते हुए 110 सीटों पर कब्जा जमाया। पिंपरी-चिंचवड़ में भी विपक्षी गठबंधन को केवल दहाई के अंकों में ही संतोष करना पड़ा। चुनाव आयोग के अनुसार, इस बार का मतदान प्रतिशत पिछले चुनावों की तुलना में स्थिर रहा, लेकिन सत्ता विरोधी लहर के बजाय सत्ता समर्थक रुझान अधिक दिखा।

NCP और NCP(SP) के लिए आगे की राह कठिन
इस हार के बाद दोनों NCP गुटों के सामने अस्तित्व का संकट गहरा गया है। लोकसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद यह लगातार दूसरा बड़ा झटका है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय दल अपनी जमीन नहीं बचा पाए, तो राज्य की राजनीति में BJP का विस्तार रोकना नामुमकिन हो जाएगा।
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