PSLV C62 launch failure: तीसरे चरण में गड़बड़ी से मिशन असफल

PSLV C62 rocket on launch pad before mission failure during third stage operation in India

सोमवार को PSLV C62 launch failure की घटना सामने आई, जब प्रक्षेपण के कुछ मिनट बाद रॉकेट के तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी दर्ज की गई। इस मिशन के तहत 16 उपग्रह कक्षा में स्थापित किए जाने थे, लेकिन अनियमितता के कारण रॉकेट निर्धारित पथ से भटक गया।

श्रीहरिकोटा से उड़ान, लेकिन मिशन अधूरा

ISRO का चार-चरणीय Polar Satellite Launch Vehicle (PSLV) आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से निर्धारित समय पर रवाना हुआ। उड़ान के शुरुआती चरणों में रॉकेट का प्रदर्शन सामान्य बताया गया।

हालांकि, प्रक्षेपण के लगभग छह मिनट बाद, जब यान हिंद महासागर के ऊपर लगभग 328 किलोमीटर की ऊंचाई पर था, तब तीसरे चरण के अंत में असामान्यता दर्ज की गई। इसके बाद मिशन अपने तय लक्ष्य को हासिल नहीं कर सका।

तीसरे चरण में आई तकनीकी अनियमितता

इसरो के अनुसार, रॉकेट का पहला और दूसरा चरण अपेक्षित मानकों के अनुरूप काम करता रहा। समस्या तीसरे चरण के अंतिम हिस्से में सामने आई, जहां वाहन के व्यवहार में विचलन देखा गया।

एजेंसी ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि उड़ान के दौरान “anomaly” आई है और ग्राउंड स्टेशनों से प्राप्त सभी आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि असफलता के कारणों को स्पष्ट किया जा सके।

PSLV C62 rocket standing on launch pad ahead of its India mission attempt

16 उपग्रह कक्षा में नहीं पहुंच सके

PSLV C62 मिशन के तहत एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के लिए तैयार किया गया था, को कक्षा में स्थापित किया जाना था। इसके साथ 15 अन्य छोटे उपग्रह भी शामिल थे।

ये उपग्रह भारत के अलावा ब्राज़ील, फ्रांस, स्पेन, थाईलैंड और यूनाइटेड किंगडम से जुड़े विभिन्न संस्थानों के थे। इनमें कुछ उपग्रह विश्वविद्यालयों द्वारा विकसित प्रायोगिक परियोजनाओं के रूप में भी शामिल थे।

लगातार दूसरी विफलता से उठे सवाल

यह घटना PSLV की 64वीं उड़ान के दौरान हुई और इसे लगातार दूसरी विफलता माना जा रहा है। इससे पहले मई 2025 में हुई 63वीं उड़ान भी तीसरे चरण में असफल रही थी।

तत्कालीन जांच में मोटर केस के भीतर दबाव में गिरावट की बात सामने आई थी। अब विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा PSLV C62 launch failure से यह सवाल उठता है कि क्या पिछली गड़बड़ी के कारणों का पूरी तरह समाधान किया गया था।

PSLV का अब तक का रिकॉर्ड

PSLV को 1996 में परिचालन रॉकेट घोषित किया गया था। 1999 के बाद से इसने 300 से अधिक उपग्रहों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाया है, जिनमें कई विदेशी मिशन भी शामिल रहे हैं।

अब तक PSLV को चार बार विफलता का सामना करना पड़ा है—1993 में पहली उड़ान, 2017 में एक मिशन, 2025 में 63वीं उड़ान और अब 2026 में PSLV C62 मिशन।

PSLV C62 rocket on launch pad before mission failure during third stage operation in India

बड़े अंतरिक्ष लक्ष्यों के बीच झटका

यह असफलता ऐसे समय पर हुई है, जब इसरो मानव अंतरिक्ष उड़ान, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और दीर्घकालिक चंद्र अभियानों जैसी योजनाओं पर काम कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थापित रॉकेट प्रणालियों में भी हजारों घटकों के कारण छोटी सी तकनीकी चूक बड़े परिणाम ला सकती है।

अधिक जानने के लिए आज ही शब्द साँची के सोशल मीडिया पेज को फॉलो करें और अपडेटेड रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *