MP Cheetah Population Boom: कूनो नेशनल पार्क के प्राकृतिक माहौल में अच्छी तरह ढल चुके चीतों ने अब अपना दायरा काफी बढ़ा लिया है, जहां वे मुरैना से लेकर ग्वालियर तक घूम रहे हैं, साथ ही श्योपुर जिले की राजस्थान से सटी सीमा वाले जिलों तक पहुंच चुके हैं, जो उनकी प्राकृतिक क्षेत्रीय व्यवहार को दर्शाता है। प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत में विशेषज्ञों ने कूनो को मात्र 30 चीतों के लिए अनुकूल माना था, लेकिन अब यहां चीतों की संख्या 50 तक पहुंच गई है, जबकि देश में कुल चीतों की संख्या 53 हो चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि मई-जून में रानी दुर्गावती अभयारण्य (नौरादेही) में चीतों को छोड़ा जाएगा, वहीं गांधीसागर अभयारण्य को दूसरे घर के रूप में पहले ही तीन चीतों को शिफ्ट किया जा चुका है।
MP Cheetah Population Boom: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में प्रोजेक्ट चीता के तहत चीतों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। 17 सितंबर 2022 को शुरू हुए इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत अफ्रीकी देशों से लाए गए कुल 20 चीतों की संख्या अब बढ़कर 53 हो गई है, जिसमें से 50 चीते कूनो नेशनल पार्क (श्योपुर जिला) में हैं, जबकि 3 चीतों को मंदसौर जिले के गांधीसागर अभयारण्य में शिफ्ट किया जा चुका है।
इस वृद्धि का मुख्य कारण पिछले कुछ महीनों में हुई कई सफल प्रसव हैं। पिछले 30 दिनों में ही कूनो में 13 शावकों का जन्म हुआ है। 7 फरवरी को आशा ने 5, 18 फरवरी को गामिनी ने 3 और 9 मार्च को ज्वाला ने 5 शावकों को जन्म दिया। कुल मिलाकर भारत में जन्मे स्वस्थ शावकों की संख्या 33 पहुंच गई है।
कूनो में सभी मादा चीताएं मां बनीं
कूनो में मौजूद सभी छह मादा चीताएं मां बन चुकी हैं। ज्वाला सबसे सफल मां साबित हुई है, जिसके तीन प्रसव हो चुके हैं और कुल 9 शावक जन्मे हैं। उसके पहले शावकों में से मुखी ने भी 5 शावकों को जन्म दिया है, जिससे इस परिवार में कुल 15 चीते हो गए हैं। केवल गांधीसागर में बसी चीता धीरा ही अभी तक मां नहीं बन सकी है।
बोत्सवाना से हाल ही में आए 9 चीतों को अभी बाड़ों में रखा गया है, जिन्हें धीरे-धीरे खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। चीतों को अन्य स्थानों पर शिफ्ट करने का फैसला चीता स्टीयरिंग कमेटी द्वारा लिया जाएगा।
रानी दुर्गावती अभयारण्य बनेगा तीसरा केंद्र
चीतों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने रानी दुर्गावती अभयारण्य (नौरादेही) को चीतों का तीसरा घर बनाने का फैसला किया है। इसका क्षेत्रफल 1,197 वर्ग किलोमीटर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य कैबिनेट की बैठक से पहले मंत्रियों को बताया कि मई-जून 2026 में यहां चीतों को छोड़ा जाएगा।
प्रोजेक्ट शुरू होने पर विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया था कि 750 वर्ग किलोमीटर के कूनो नेशनल पार्क में 30 चीते आसानी से रह सकते हैं, क्योंकि यहां पर्याप्त शिकार (प्रेय) उपलब्ध है। प्रत्येक चीते को 50-100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की जरूरत होती है। बढ़ती संख्या के मद्देनजर कूनो में श्योपुर और शिवपुरी वन मंडलों के हिस्से जोड़े गए हैं। साथ ही राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों को मिलाकर कॉरिडोर तैयार करने की कवायद चल रही है। चीते अब मुरैना, ग्वालियर तक और राजस्थान सीमा पर घूम रहे हैं।
सरकार का लक्ष्य और भविष्य की योजना
पिछले दिनों मध्य प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा था कि साल के अंत तक चीतों की संख्या 50 तक पहुंचाने का लक्ष्य है, जिसे हाल की जन्मों से पहले ही हासिल कर लिया गया। अब अन्य स्थानों पर वृद्धि की तैयारी की जा रही है। उत्तम कुमार शर्मा, निदेशक, चीता प्रोजेक्ट के अनुसार, कूनो में वंशवृद्धि तेजी से हो रही है और शावकों के साथ नए चीतों को भी समय-समय पर खुले जंगल में छोड़ा जाएगा।

