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सीधी में दो महीने पहले ही लीक हो गया था कॉलेज का पेपर: दोषी प्रोफेसर ब्लैकलिस्ट, FIR से मिली ‘छूट’!

Professor found guilty in Sidhi paper leak case exempted from FIRProfessor found guilty in Sidhi paper leak case exempted from FIR

Professor found guilty in Sidhi paper leak case exempted from FIR

सीधी/रीवा। मध्य प्रदेश के सीधी जिले स्थित संजय गांधी स्मृति स्वशासी महाविद्यालय में पेपर लीक का एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां 3 जून को आयोजित होने वाला अंग्रेजी विषय का प्रश्नपत्र निर्धारित तिथि से लगभग दो महीने पहले, यानी 5 अप्रैल को ही यूट्यूब पर लीक और वायरल कर दिया गया था। जांच के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने मामले की पुष्टि करते हुए मऊगंज में पदस्थ सहायक प्राध्यापक प्रभाकर सिंह को इस फर्जीवाड़े का मुख्य दोषी पाया है।

परीक्षा कार्यों से ब्लैकलिस्ट, लेकिन आपराधिक कार्रवाई का इंतज़ार

मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग रीवा संभाग के अतिरिक्त संचालक डॉ. महेंद्रमणि द्विवेदी ने त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई की है। दोषी सहायक प्राध्यापक प्रभाकर सिंह को भविष्य के सभी परीक्षा संबंधी कार्यों, प्रश्नपत्र निर्माण (Paper Setting) और उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य से तत्काल प्रभाव से पृथक करते हुए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर हुए पेपर लीक कांड के बावजूद आरोपी प्राध्यापक के खिलाफ अब तक कोई पुलिस प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं कराई गई है, जिसे लेकर प्रशासनिक मंशा पर सवाल उठने लगे हैं।

अतिरिक्त संचालक की सफाई: एफआईआर कराना कॉलेज प्रबंधन का काम

आपराधिक मामला दर्ज न कराने के सवाल पर उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक डॉ. महेंद्रमणि द्विवेदी का कहना है कि विभागीय स्तर पर जो दंडात्मक कार्रवाई संभव थी, वह कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले में पुलिस एफआईआर दर्ज कराने का विधिक अधिकार और जिम्मेदारी संबंधित महाविद्यालय (संजय गांधी स्मृति स्वशासी कॉलेज) प्रबंधन की है, न कि सीधे संभागीय कार्यालय की।

दावों और जमीनी हकीकत के बीच विरोधाभास

एक तरफ जहां राज्य सरकार और प्रशासन प्रतियोगी व अकादमिक परीक्षाओं के पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, वहीं सीधी के इस मामले में केवल प्रशासनिक स्तर पर ब्लैकलिस्टिंग और निलंबन जैसी खानापूर्ति ने कड़े दंडात्मक प्रावधानों की पोल खोल दी है। बिना पुलिस जांच और आपराधिक प्रकरण दर्ज किए आरोपी के खिलाफ आगे की कड़ी कार्रवाई अटक गई है, जिससे छात्रों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है।

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