AMERICA जाने के लिए INDIANS की मुश्किलें नहीं हो रही खत्म, अमेरिका ने रद्द किए 2K VISA

पुलिस का कहना है कि इन सेवाओं के लिए आवेदकों (INDIANS VISA) से 1 लाख रुपये से 15 लाख रुपये के बीच शुल्क लिया गया था

PROBLEMS Indians going America: भारत में अमेरिकी दूतावास ने करीब 2000 वीजा (INDIANS VISA) अपॉइंटमेंट रद्द कर दिए हैं। दूतावास के मुताबिक, ये अपॉइंटमेंट आधिकारिक नीतियों का उल्लंघन करके बुक किए गए थे। यह कदम वीजा आवेदन प्रक्रिया में धोखाधड़ी से निपटने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। अमेरिकी दूतावास ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए एक महत्वपूर्ण सूचना जारी कर वीजा रद्द किए जाने की जानकारी दी।

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एजेंटों और फिक्सरों के लिए जीरो टॉलरेंस

अमेरिकी दूतावास ने कहा कि ये अपॉइंटमेंट बॉट्स के जरिए किए गए थे और कहा कि शेड्यूलिंग नीतियों का उल्लंघन करने वाले एजेंटों और फिक्सरों के लिए जीरो टॉलरेंस अपनाया जाता है। अमेरिकी दूतावास ने पोस्ट में लिखा, “भारतीय वाणिज्य दूतावास की टीम ने ऐसे बुरे लोगों की पहचान की है, जिन्होंने लगभग 2,000 वीजा अपॉइंटमेंट (INDIANS VISA) किए हैं। जो हमारी शेड्यूलिंग नीतियों का उल्लंघन करते हैं। हम तत्काल प्रभाव से इन अपॉइंटमेंट को रद्द कर रहे हैं और संबंधित खातों के शेड्यूलिंग विशेषाधिकारों को निलंबित कर रहे हैं। हम अपने धोखाधड़ी विरोधी प्रयासों को जारी रखेंगे। धोखाधड़ी के लिए हमारी जीरो टॉलरेंस नीति है।”

INDIANS को VISA के लिए करनी पड़ रही मशक्कत

एक रिपोर्ट के अनुसार, दूतावास की यह घोषणा फरवरी में दिल्ली पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज किए जाने के बाद आई है। 27 फरवरी को पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों के 30 से अधिक व्यक्तियों के खिलाफ मई और अगस्त 2024 के बीच अमेरिकी वीजा प्राप्त करने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज जमा करने का मामला दर्ज किया गया था। एफआईआर के अनुसार, आरोपियों में वीजा एजेंट और आवेदक शामिल हैं। जांचकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने बैंक स्टेटमेंट, शैक्षणिक प्रमाण पत्र और रोजगार रिकॉर्ड जैसे नकली दस्तावेज बनाने के लिए मिलकर काम किया।

झूठे दावों वाले 21 आवेदनों चिह्नित

अमेरिकी अधिकारियों ने झूठे दावों वाले 21 आवेदनों को चिह्नित किया। पुलिस का कहना है कि इन सेवाओं के लिए आवेदकों (INDIANS VISA) से 1 लाख रुपये से 15 लाख रुपये के बीच शुल्क लिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, दूतावास ने कहा कि इसकी आंतरिक जांच ने संदिग्ध आवेदनों से जुड़े सलाहकारों और विक्रेताओं की पहचान करने के लिए आईपी एड्रेस डेटा का इस्तेमाल किया। कई सबमिशन में इसी तरह के धोखाधड़ी के पैटर्न देखे गए।

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