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प्रियंका गांधी और अनुराग ठाकुर के बीच संसद में तीखी बहस: आईआईटी प्रोफेसर को लेकर क्यों हुआ बवाल?

प्रियंका गांधी लोकसभा भाषणप्रियंका गांधी लोकसभा भाषण

प्रियंका गांधी लोकसभा भाषण

लोकसभा में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान राजनीतिक पारा उस समय चढ़ गया जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और पूर्व केंद्रीय मंत्री व बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। संसद में इस हंगामे की मुख्य वजह प्रधानमंत्री द्वारा गठित परीक्षा सुधार टास्क फोर्स के एक सदस्य को लेकर की गई टिप्पणी बनी।

संसद में क्या हुआ? (विवाद की मुख्य वजह)

प्रियंका गांधी का बयान और ‘गोमूत्र’ तंज

सदन को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए बनाई गई नई कमेटी के पुनर्गठन पर सवाल उठाए। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि इस नई समिति में एक पूर्व IB चीफ, एक IT कंपनी के मालिक और एक “गोमूत्र विशेषज्ञ” शामिल हैं। उनकी यह टिप्पणी आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर प्रो. वी. कामकोटी की तरफ इशारा मानी गई।

अनुराग ठाकुर का तीखा पलटवार और आपत्ति

प्रियंका गांधी के इस बयान पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध जताया। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि प्रियंका गांधी देश के एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद का अपमान कर रही हैं। अनुराग ठाकुर ने कहा कि राजनीतिक हमले के चक्कर में देश के शीर्ष शोधकर्ताओं की प्रतिभा का मज़ाक उड़ाना दुखद है।

कौन हैं प्रो. वी. कामकोटी?

भारत के पहले स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘शक्ति’ के जनक

प्रो. वी. कामकोटी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कंप्यूटर वैज्ञानिक हैं। वह आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर हैं और उनके नेतृत्व में भारत का पहला स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘शक्ति’ (Shakti) विकसित किया गया था। वह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB) के सदस्य भी रह चुके हैं और उन्हें पद्म श्री सहित कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

परीक्षा सुधार टास्क फोर्स में भूमिका

NEET पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए एक बहुविषयक टास्क फोर्स बनाई। प्रो. कामकोटी को उनके तकनीकी अनुभव और आईआईटी में निष्पक्ष परीक्षा संचालन के ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर इस समिति में शामिल किया गया है।

विवाद की पृष्ठभूमि और पुरानी टिप्पणी

प्रो. कामकोटी से जुड़ा यह विवाद दरअसल 2025 के एक कार्यक्रम का है, जहाँ उन्होंने पारंपरिक भारतीय कृषि और जैविक खेती के संदर्भ में देसी गाय के दूध और गोमूत्र के जैविक गुणों पर बात की थी। इसी पुरानी टिप्पणी का हवाला देते हुए प्रियंका गांधी ने संसद में तंज कसा था, जिसे बीजेपी ने वैज्ञानिक समुदाय का अपमान करार दिया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: प्रियंका गांधी और अनुराग ठाकुर के बीच बहस किस मुद्दे पर हुई?

उत्तर: लोकसभा में परीक्षा सुधार विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने शिक्षा सुधार समिति के सदस्य प्रो. वी. कामकोटी को “गोमूत्र विशेषज्ञ” कह दिया। इस पर बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि कांग्रेस नेता एक सम्मानित वैज्ञानिक का अपमान कर रही हैं, जिससे संसद में हंगामा हो गया।

प्रश्न 2: प्रो. वी. कामकोटी कौन हैं और उन्हें क्यों निशाना बनाया गया?

उत्तर: प्रो. वी. कामकोटी आईआईटी मद्रास के निदेशक और जाने-माने कंप्यूटर वैज्ञानिक हैं। वे भारत के पहले स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘शक्ति’ के निर्माता हैं। 2025 में जैविक खेती पर दिए उनके एक पुराने बयान के कारण प्रियंका गांधी ने उन्हें परीक्षा सुधार समिति में शामिल करने पर तंज कसा था।

प्रश्न 3: परीक्षा सुधार टास्क फोर्स का गठन क्यों किया गया है?

उत्तर: NTA द्वारा आयोजित NEET जैसी राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक की घटनाओं के बाद यह टास्क फोर्स गठित की गई। इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि और प्रो. कामकोटी जैसे विशेषज्ञ इसमें शामिल हैं, ताकि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और लीक-प्रूफ बनाया जा सके।

प्रश्न 4: अनुराग ठाकुर ने प्रियंका गांधी के बयान के जवाब में क्या कहा?

उत्तर: अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रियंका गांधी मासूम चेहरा बनाकर अपनी पार्टी की पुरानी विफलताओं को छिपाने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने प्रो. कामकोटी के शैक्षणिक रिकॉर्ड और पद्म श्री सम्मान का हवाला देते हुए कहा कि देश के शीर्ष वैज्ञानिकों पर ऐसी अशोभनीय टिप्पणी करना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है।

निष्कर्ष

लोकसभा में प्रियंका गांधी और अनुराग ठाकुर के बीच हुई यह बहस केवल एक राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात को भी रेखांकित करती है कि नीतिगत सुधारों के दौर में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप किस तरह मुख्य मुद्दों पर हावी हो जाते हैं। जहाँ विपक्ष परीक्षा सुधार समिति के गठन की मंशा पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष अपने विशेषज्ञों की साख और योग्यताओं के बचाव में मजबूती से खड़ा है।

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