Death Anniversary Of C.H. Atma :सीएच आत्मा फिल्म जगत का ऐसा नाम रहे जिन्हें बहुआयामी व्यक्तित्व के लिए जाना जाता है और आज भी याद किया जाता क्योंकि वो प्ले बैक सिंगर भी रहे और बतौर ग़ज़ल गायक भी उन्होंने एक अलग पहचान बनाई इसके अलावा कमाल के अभिनेता भी थे।
‘प्रीतम आन मिलो’ गीता दत्त से पहले गाया सी एच आत्मा ने :-
तो चलिए थोड़ा और जानते हैं सी एच आत्मा को जिनका पूरा नाम था आत्मा हशमतराय चैनानी ।
1923 को हैदराबाद (सिंध) यानी आज के पाकिस्तान में, पैदा हुए सी एच आत्मा ,ने 1945 में डेब्यू किया। उनका सदाबहार गाना ‘प्रीतम आन मिलो’ है, जिसे उन्होंने 1945 में एक निजी एल्बम के लिए गाया था और 1955 में, इसी गाने को गीता दत्त ने फिल्म ‘मिस्टर एंड मिसेज 55’ में ओपी नैयर के संगीत निर्देशन में गाया था ।
केएल सहगल से मिलती थी आवाज़ :-
उनकी आवाज़ केएल सहगल से काफी मिलती जुलती थी । लेकिन उनकी अपनी अनूठी शैली थी जिससे वो उन कुछ गायकों में से एक बन गए जो फिल्मी और ग़ैर-फिल्मी संगीत दोनों में बहोत लोकप्रिय हुए या पसंद किए गए ।
ओपी नैय्यर के संगीत निर्देशन में 1952 में आई आपकी पहली फिल्म, ‘आसमान’ थी जिसमें गीता दत्त के साथ उनके एकल और युगल गीत, काफी पसंद किए गए। उनके कुछ और दिलकश नग़्मों को हम याद करें तो सीएच आत्मा ने वी. शांताराम द्वारा निर्देशित फिल्म ‘ गीत गाया पत्थरों ने’ में एक ग़ज़ल गायी थी और 1951 की फिल्म ‘नगीना’ के लिए दो गाने भी गाए, जिसका संगीत शंकर-जयकिशन ने तैयार किया था ।
छोटा मगर यादगार रहा करियर :-
उन्होंने लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी गायिकाओं के साथ कई युगल गीत गाए लेकिन अफसोस के साथ हमें ये कहना पड़ता है कि बॉलीवुड में अभी उनकी ये शुरुआत ही थी उनका करियर छोटा ही रहा, सिर्फ़ 10 साल का ,मगर बेहद यादगार ।
बतौर नायक आप उन्हें देख सकते हैं (1954) की फिल्म ‘भाईसाहब’ में ( पूर्णिमा और स्मृति बिस्वास के साथ ) और (1954)की ‘बिल्वमंगल’ में ( सुरैया के साथ ) ।
क्यों ख़ुश नहीं थे फिल्म जगत से :-
सीएच आत्मा लोकप्रिय गायक चंद्रू आत्मा के बड़े भाई थे जिनकी वजह से वो फिल्म संगीत से जुड़ गए पर लोग कहते हैं,उन्हें लगता था कि वो जितना अच्छा कर सकते हैं या जैसा करना चाहते हैं वो नहीं कर पा रहे हैं या उनकी काबिलियत का पूरा इस्तेमाल नहीं हुआ इसलिए वो फिल्म जगत से ज़्यादा खुश नहीं थे।
जोड़ गए एक नया अध्याय :-
हम आपको ये भी बताते चलें कि वो 1957 में भारत के बाहर नैरोबी, पूर्वी अफ्रीका में दौरे पर जाने और गाने वाले भारत के पहले गायक थे ये सिलसिला बरसों जारी रहा फिर 1975 में ,अपने इंग्लैंड गायन दौरे के बाद ही वे बीमार पड़ गए थे और 6 दिसंबर 1975 को महज़ 52 साल की उम्र में वो हमें छोड़कर चले गए लेकिन फिल्म जगत की किताब में जोड़ गए एक अनमोल अध्याय ,एक उम्दा सबक़।
जो हमेशा उनके चाहने वालों को पन्ना पलटा कर उनके बारे में जानने और उनसे कुछ सीखने के लिए विवश करता रहेगा।
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