नई दिल्ली। शिक्षक दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों से मुलाकात की। पीएम ने सम्मान पाने वाले 48 शिक्षकों से बातचीत की। इसका करीब 5 मिनट का वीडियो उन्होंने अपने चैनल पर शेयर किया है।
बच्चों को पब्लिक स्पीकिंग सिखाने वाली एक महिला शिक्षक से पीएम ने खुद पब्लिक स्पीकिंग के टिप्स पूछे। उन्होंने कहा, “अगर मैं आपके यहां का स्टूडेंट हूं और मुझे एक अच्छा स्पीकर बनना है तो मुझे टिप्स दीजिए कि मुझे क्या-क्या करना चाहिए।”
इस पर शिक्षक ने जवाब दिया कि आपको कॉन्फिडेंस दिखाना होगा। पीएम मोदी ने हंसते हुए फिर पूछा कि आखिर यह कॉन्फिडेंस आता कहां से है? शिक्षक ने कहा कि इसके लिए लगातार प्रैक्टिस करनी होती है।
इस वर्ष तीन विभागों से 82 टीचर्स और एजुकेटर्स को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया है। इनमें 48 स्कूली शिक्षक, उच्च शिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक से 21 फैकल्टी सदस्य और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय से 13 स्किल ट्रेनर शामिल हैं।
पीएम ने 3 बातों पर दिया जोर
शिक्षकों से बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने मुख्य रूप से तीन मुद्दों पर जोर दिया। उन्होंने स्क्रीन टाइम, ड्रेस कोड और बच्चों के बदलते व्यवहार को लेकर शिक्षकों से बात की।
स्क्रीन टाइम को लेकर पीएम ने कहा कि स्क्रीन टाइम एक तरह की लत बन गया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई बच्चा खेल में गहरी रुचि लेने लगता है और खेल से उनका मतलब वीडियो गेम नहीं, बल्कि मैदान पर जाकर वास्तविक खेल खेलने से है, तो धीरे-धीरे वह इस लत से बाहर निकल सकता है।
ड्रेस कोड को लेकर भी पीएम ने बात की। उन्होंने कहा कि कई बड़े शहरों और विश्वविद्यालयों में ड्रेस कोड का मुद्दा सामने आया है। ऐसी जगहों पर जागरूकता की कमी है और बिना किसी स्पष्टीकरण के नियम लागू कर दिए जाते हैं।
प्रधानमंत्री ने बच्चों के बदलते व्यवहार को लेकर शिक्षकों से जागरूक रहने को कहा। उन्होंने कहा कि आज शिक्षकों को बच्चों के मन में पैदा होने वाली आशंकाओं और इससे जुड़े प्रभावों को लेकर जागरूक रहने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें बच्चों का बचपन खत्म नहीं होने देना है। इसे बचाए रखने के लिए शिक्षक सबसे बेहतर स्थिति में हैं। यह सुनिश्चित करना शिक्षक का कर्तव्य है कि बच्चे का बचपन जीवित रहे।
मध्य प्रदेश के दो शिक्षकों को मिलेगा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए मध्य प्रदेश के 2 शासकीय शिक्षकों का चयन हुआ है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला और सीधी के शैलेन्द्र प्रताप सिंह को शिक्षा में दिए गए उनके योगदान के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा जाएगा। दोनों शिक्षकों को 5 सितंबर को दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा पुरस्कार दिया जाएगा।
विंध्य क्षेत्र के शिक्षक को राष्ट्रीय सम्मान
विंध्य क्षेत्र के सीधी जिले में शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कंजवार में कार्यरत माध्यमिक शिक्षक शैलेन्द्र प्रताप सिंह को पुरस्कार के लिए चुना गया है। इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए उनका चयन पूरे विंध्य क्षेत्र और शिक्षा जगत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। वहीं, राजधानी भोपाल में उच्च माध्यमिक स्तर पर कार्यरत शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला का भी राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन किया गया है। दोनों शिक्षकों का चयन मध्य प्रदेश के शिक्षा जगत के लिए गौरव की बात है।

