President Murmu festival greetings के तहत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोहड़ी, मकर संक्रांति, पोंगल और माघ बिहू के अवसर पर देश और विदेश में रहने वाले भारतीयों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने इन पर्वों को भारत की कृषि विरासत, किसानों के परिश्रम और राष्ट्रीय एकता से जोड़कर बताया।
राष्ट्रपति का संदेश और उसका आशय
राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने मंगलवार को जारी अपने संदेश में कहा कि लोहड़ी, मकर संक्रांति, पोंगल और माघ बिहू जैसे पर्व भारत की समृद्ध कृषि परंपराओं के प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि इन त्योहारों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विविधता और एकता दोनों स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि ये अवसर प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और किसानों की मेहनत को सम्मान देने का माध्यम हैं। उन्होंने कामना की कि ये पर्व सभी के जीवन में खुशहाली और समृद्धि लेकर आएं।
President Murmu festival greetings और कृषि परंपरा
President Murmu festival greetings में कृषि आधारित जीवनशैली को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। भारत में फसल पर्व केवल मौसम परिवर्तन का संकेत नहीं होते, बल्कि वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना से गहराई से जुड़े रहते हैं।
राष्ट्रपति के संदेश में यह बात सामने आई कि किसान देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं। ऐसे में फसल पर्वों के जरिए उनके योगदान को याद करना सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।

केंद्रीय गृह मंत्री की प्रतिक्रिया
राष्ट्रपति के संदेश के साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने भी लोहड़ी के अवसर पर नागरिकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लोहड़ी को उत्साह, नई ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक बताया।
गृह मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि यह पर्व समाज में खुशहाली और सामूहिक आनंद को बढ़ावा देता है। उन्होंने नागरिकों के सुखद और समृद्ध जीवन की कामना की।
कांग्रेस अध्यक्ष ने भी दीं शुभकामनाएं
कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने भी लोहड़ी के मौके पर देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने लोहड़ी को खुशी और उत्सव का पर्व बताया, जो लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
खड़गे ने अपने संदेश में कहा कि ऐसे पर्व समाज में सामूहिकता और आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं।
फसल पर्वों का सामाजिक महत्व
लोहड़ी, मकर संक्रांति, पोंगल और माघ बिहू भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में मनाए जाते हैं, लेकिन इनकी मूल भावना समान है। ये सभी पर्व फसल, प्रकृति और परिश्रम के सम्मान से जुड़े हैं।
माघ बिहू असम में कटाई के मौसम के अंत का प्रतीक है और सामूहिक भोज के साथ मनाया जाता है। वहीं पोंगल दक्षिण भारत में नई फसल के स्वागत का पर्व है। लोहड़ी उत्तर भारत में अलाव, लोकगीत और पारंपरिक भोजन के साथ मनाई जाती है।

सांस्कृतिक विविधता और एकता का संदेश
इन सभी पर्वों की विशेषता यह है कि वे भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं। अलग-अलग परंपराओं और रीति-रिवाजों के बावजूद इनका संदेश एक ही रहता है—प्रकृति के प्रति सम्मान और सामूहिक जीवन का उत्सव।
नेताओं के संदेश इस बात को रेखांकित करते हैं कि त्योहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता को मजबूत करने का माध्यम भी हैं।
अधिक जानने के लिए आज ही शब्द साँची के सोशल मीडिया पेज को फॉलो करें और अपडेटेड रहे।
- Facebook: shabdsanchi
- Instagram: shabdsanchiofficial
- YouTube: @shabd_sanchi
- Twitter: shabdsanchi
