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रीवा न्यूक्लियर प्लांट विवाद पर गरमाई सियासत, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार बोले- ‘यहां प्लांट नहीं लगने दूंगा’

Politics heats up over Rewa nuclear plant controversy

Politics heats up over Rewa nuclear plant controversy

प्रमुख बिंदु:

पीड़ित परिवार से मिले उमंग सिंघार, आर्थिक सहायता दी

रीवा के सिरमौर क्षेत्र में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध और ‘जल सत्याग्रह’ के दौरान आदिवासी महिला विमला कोल की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। रविवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार को 1 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की और स्पष्ट शब्दों में कहा कि रीवा में न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं लगने देंगे तथा इस गंभीर मुद्दे को विधानसभा में जोरदार तरीके से उठाएंगे।

तहसीलदार को लगाई फटकार, रिपोर्ट पर पूछे सवाल

पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान उमंग सिंघार ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने तहसीलदार ललन और नायब तहसीलदार बिंदू तिवारी को फटकार लगाते हुए पूछा कि विमला कोल की मौत की रिपोर्ट अब तक आगे क्यों नहीं भेजी गई। इस पर तहसीलदार द्वारा मौखिक रिपोर्ट भेजे जाने की बात कहने पर सिंघार ने कड़ी नाराजगी जताई और जवाब तलब किया।

कलेक्टर और मृतका के पति के बयानों में भारी अंतर

विमला कोल की मौत के कारणों को लेकर जिला कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी और मृतका के पति जमुना कोल के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास सामने आया है। कलेक्टर का दावा है कि विमला की मौत गिरने से हुई थी और वह किसी जल सत्याग्रह या आंदोलन में शामिल नहीं थीं।

इसके विपरीत, जमुना कोल, उनके रिश्तेदारों और गांव के लोगों ने कलेक्टर के इस दावे को खारिज कर दिया है। पति जमुना कोल का कहना है कि उनकी पत्नी किसी खाई या ऊंचाई से नहीं गिरी थीं, बल्कि जल सत्याग्रह के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद वे जमीन पर बैठ गईं और उनकी मौत हो गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कलेक्टर न तो मौके पर आए और न ही उनसे मिले, जबकि उनके पास विमला के आंदोलन में शामिल होने के पुख्ता फोटो और वीडियो मौजूद हैं।

ग्रामीणों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी

विमला कोल की मौत के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन के रुख पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। ग्रामीणों ने एकजुट होकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। यह विरोध केवल न्यूक्लियर पावर प्लांट तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन, पानी, पर्यावरण और ग्रामसभा की सहमति से जुड़े अन्य गंभीर मुद्दे भी इसमें शामिल हैं।

प्रदेश स्तर पर चर्चा का केंद्र बना मामला

सिरमौर क्षेत्र के सरई कला और रोझौही गांवों के ग्रामीण टाटा पावर की इस प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर परियोजना का लगातार विरोध कर रहे हैं। 9 अक्टूबर को रोझौही में तकनीकी जांच के लिए बोरिंग मशीनें पहुंचने पर ग्रामीणों ने काम रुकवा दिया था, जिसके बाद 10 अक्टूबर को प्रशासन, कंपनी और ग्रामीणों के बीच हुई बैठक भी बेनतीजा रही थी।

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और रीवा जिला कांग्रेस अध्यक्ष इंजीनियर राजेंद्र शर्मा पहले ही अपना विरोध जता चुके हैं। अब नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के इस मामले में हस्तक्षेप करने और विधानसभा में आवाज उठाने के ऐलान के बाद यह मुद्दा पूरे प्रदेश में सुर्खियों में आ गया है।

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