MP: हिड़मा एनकाउंटर पर दिग्विजय सिंह के सवाल से मध्य प्रदेश में सियासी बवाल

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Madvi Hidma Encounter: छत्तीसगढ़ में कुख्यात नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा के एनकाउंटर के बाद विवाद अब मध्य प्रदेश की राजनीति तक पहुँच गया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे संदेहास्पद बताया, जिसके बाद प्रदेश में सियासी बवाल खड़ा हो गया। जवाब में प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने तीखा पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह बार-बार राष्ट्र-विरोधी तत्वों का समर्थन करते दिखाई देते हैं। इस बयानबाजी से दोनों दलों के बीच तल्खी और बढ़ गई है।

Madvi Hidma Encounter: छत्तीसगढ़ के कुख्यात नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा के एनकाउंटर में मारे जाने के तीन दिन बाद मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा एनकाउंटर की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जाने के बाद भाजपा ने उन पर तीखा हमला बोला है।

दिग्विजय सिंह ने बुधवार देर रात अपने एक्स हैंडल पर बस्तर की सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोढ़ी का एक वीडियो साझा किया। वीडियो में सोढ़ी ने दावा किया कि 18 नवंबर को आंध्र प्रदेश के अल्लुरी सितारामा राजू जिले में हुई मुठभेड़ वास्तव में योजनाबद्ध हत्या थी। उनके अनुसार हिड़मा, उनकी पत्नी माड़वी राजे और चार अन्य साथियों को पहले गिरफ्तार किया गया और बाद में मारा गया। सोढ़ी ने पुलिस की टाइमलाइन को संदिग्ध बताया और न्यायिक जांच की मांग की।

भाजपा ने किया हमला

वीडियो वायरल होते ही भाजपा नेताओं ने दिग्विजय सिंह पर जोरदार हमला किया।प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा, “दिग्विजय सिंह जी तुष्टिकरण की राजनीति में इतने अंधे हो चुके हैं कि शहीद जवानों के लिए उनके पास एक शब्द नहीं, लेकिन नक्सलियों के लिए संवेदना जरूर है। यह राष्ट्र-विरोधी मानसिकता है।”भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कहा, “जब-जब देश के जवान शहीद होते हैं, दिग्विजय सिंह चुप्पी साध लेते हैं, लेकिन नक्सली या आतंकवादी मारा जाता है तो सबसे पहले सवाल खड़े करते हैं। यही कारण है कि जनता कांग्रेस को बार-बार नकार रही है।”

दिग्विजय सिंह ने दिया स्पष्टीकरण

आलोचनाओं के बाद दिग्विजय सिंह ने गुरुवार को बयान जारी कर कहा, “मैं नक्सली हिंसा का पुरजोर विरोधी हूं और हमेशा रहूंगा। लेकिन समाधान केवल बंदूक से नहीं, बातचीत और आत्मसमर्पण नीति से भी निकलना चाहिए। असली मुद्दा आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन और उनके संवैधानिक अधिकारों का है। PESA कानून आज भी शेड्यूल्ड क्षेत्रों में पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। बिना दस्तावेज के आदिवासी मतदाता सूची में कैसे शामिल होंगे? यह उनकी नागरिकता पर ही सवाल है।”

क्या हुआ था 18 नवंबर को?

18 नवंबर 2025 को आंध्र प्रदेश के अल्लुरी सितारामा राजू जिले में छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश पुलिस के संयुक्त अभियान में माड़वी हिड़मा, उसकी पत्नी माड़वी राजे मड़कम और चार अन्य माओवादियों की मौत हुई थी। हिड़मा दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य था और उस पर करीब एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। सुरक्षा बलों के अनुसार यह एक वास्तविक मुठभेड़ थी। फिलहाल इस मामले में किसी स्वतंत्र या न्यायिक जांच की घोषणा नहीं हुई है।

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