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Jharkhand High Court Case : जज को उंगली दिखाना पड़ा भारी, सुप्रीम कोर्ट ने वकील को लगाई फटकार

Jharkhand High Court Case : अदालत कक्ष में न्यायाधीश के प्रति अमर्यादित व्यवहार और तीखी बहस करने वाले एक वकील को सुप्रीम कोर्ट से कड़ी फटकार मिली है। झारखंड हाई कोर्ट के एक जज के साथ बदसलूकी के मामले में सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने वकील को स्पष्ट चेतावनी दी कि न्यायपालिका की गरिमा को चुनौती देना उन्हें भारी पड़ सकता है।

बिजली कनेक्शन और विधवा के केस का था विवाद।

यह पूरा मामला 16 अक्टूबर 2023 का है। झारखंड हाई कोर्ट में एडवोकेट महेश तिवारी एक विधवा महिला का केस लड़ रहे थे, जिसका 1.30 लाख बकाया होने के कारण बिजली का कनेक्शन काट दिया गया था। सुनवाई के दौरान जस्टिस राजेश कुमार और वकील तिवारी के बीच बहस शुरू हो गई। स्थिति तब बिगड़ गई जब जस्टिस कुमार ने स्टेट बार काउंसिल से वकील के आचरण की जांच करने को कहा।

बक़ील ने जज को उंगली दिखाकर की बात। Jharkhand High Court Case

प्रत्यक्षदर्शियों और कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार, वकील महेश तिवारी ने जज की ओर उंगली दिखाते हुए कहा, “मैं अपनी तरह से बहस कर सकता हूँ, वैसे नहीं जैसा आप कह रहे हैं। याद रखें, किसी भी वकील का अपमान करने की कोशिश न करें। मैं आपको बता रहा हूँ।” जब जज ने उनके व्यवहार पर आपत्ति जताई, तो तिवारी ने उन्हें लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग देखने तक की चुनौती दे दी। इस घटना के बाद हाई कोर्ट ने वकील के खिलाफ आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया था।

सुप्रीम कोर्ट में CJI की तल्ख टिप्पणी। Jharkhand High Court Case

हाई कोर्ट के नोटिस के खिलाफ वकील ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जहाँ उन्हें भारी नाराजगी का सामना करना पड़ा। CJI सूर्यकांत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे वकील सुप्रीम कोर्ट से आदेश लेकर यह दिखाना चाहते हैं कि कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। CJI ने कहा, “अगर वह जजों को चुनौती देना चाहते हैं, तो दें। हम भी यहाँ बैठे हैं और देखेंगे कि वह क्या कर सकते हैं।” कोर्ट ने साफ किया कि वकील का व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

बकील माफी मांगे तो हाईकोर्ट बरत सकती हैं नरमी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इनकार करते हुए वकील को वापस हाई कोर्ट जाने की सलाह दी। बेंच ने निर्देश दिया कि यदि वकील अपनी गलती स्वीकार करते हुए बिना शर्त माफी मांगते हैं, तो हाई कोर्ट उनके प्रति सहानुभूतिपूर्ण रुख अपनाए। कोर्ट ने संदेश दिया कि न्याय के मंदिर में ‘बार’ (वकील) और ‘बेंच’ (जज) के बीच संवाद की मर्यादा सर्वोपरि है।

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