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जनवरी में फैक्ट्री विस्तार बढ़ा, PMI बावजूद उद्योग भरोसा कमजोर

जनवरी में फैक्ट्री विस्तार बढ़ा, PMI बावजूद उद्योग भरोसा कमजोर

जनवरी में फैक्ट्री विस्तार बढ़ा, PMI बावजूद उद्योग भरोसा कमजोर

January PMI: भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जनवरी 2026 के दौरान हल्का सुधार देखने को मिला है। ताज़ा PMI आंकड़ों के अनुसार उत्पादन और नए ऑर्डर में भी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन उद्योग जगत का भविष्य को लेकर भरोसा थोड़ा कमज़ोर पड़ा है। घरेलू मांग ने सहारा दिया, जबकि निर्यात और रोजगार के संकेत अभी भी संतुलित नहीं दिख रहे हैं।

PMI में सुधार, लेकिन उम्मीद से कम रफ्तार

जनवरी में भारत का मैन्युफैक्चरिंग PMI 55.4 पर दर्ज किया गया, जो दिसंबर के 55.0 से थोड़ा बेहतर है। 50 से ऊपर का स्तर उत्पादन गतिविधि के बढ़ते विस्तार को दर्शाता है, इसलिए यह संकेत पॉजिटिव माना जा रहा है। हालांकि, यह आंकड़ा बाजार की शुरुआती उम्मीदों से कम ही रहा, जिससे यह स्पष्ट है कि सुधार की गति अभी भी सीमित मात्रा में ही है।

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घरेलू मांग बनी सहारा, निर्यात अभी कमजोर

रिपोर्ट में सामने आया कि फैक्ट्रियों को नए घरेलू ऑर्डर अधिक मिले हैं, जिससे उत्पादन बढ़ता दिख रहा है। लेकिन निर्यात ऑर्डर में उतनी तेजी नहीं आई है। इसका मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से भारतीय उद्योग को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पा रहा है। घरेलू बाजार की मजबूती ही इस समय मैन्युफैक्चरिंग को संभाले हुए ही दिख रही है।

रोजगार में हलचल, पर तेजी नहीं

जनवरी में कंपनियों ने कुछ नई भर्तियां कीं, जो पिछले तीन महीनों में सबसे बेहतर ही दिख रहीं थीं। फिर भी यह वृद्धि इतनी मजबूत नहीं हो पाई है कि इसे बड़े रोजगार उछाल के रूप में देखा जाए। कंपनियां अभी भी सतर्क मोड अपनाए हुए ही हैं और बड़े पैमाने पर नियुक्तियों से बच रही हैं।

लागत बढ़ी, लेकिन कीमतें नहीं बढ़ा पाए निर्माता

केमिकल, धातु और परिवहन जैसी इनपुट लागतों में बढ़ोतरी देखी गई, जो चार महीनों में सबसे ज्यादा तेज़ रही। इसके बावजूद कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने से बचती नजर आईं। इसका संकेत यह है कि बाजार में मांग उतनी मजबूत नहीं हो पाई है कि उपभोक्ता बढ़ी कीमतें स्वीकार कर सकें।

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भविष्य को लेकर उद्योग जगत का भरोसा घटा

सबसे महत्वपूर्ण संकेत व्यापारिक विश्वास में आई गिरावट को माना जाता है। बहुत कम कंपनियों ने आने वाले साल में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद भी जताई है। यह बताता है कि वर्तमान सुधार के बावजूद उद्योग जगत भविष्य को लेकर बिल्कुल भी आश्वस्त नहीं है और निवेश व विस्तार के फैसले सोच-समझकर ले रहा है। जनवरी के PMI आंकड़े बताते हैं कि भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर विस्तार की दिशा में तो है, लेकिन यह विस्तार मजबूत गति से नहीं बढ़ रहा है।

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