India-EU FTA: वैश्विक व्यापार में भारत की नई पहचान
पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि भारत अब विकसित देशों के साथ बराबरी के स्तर पर बातचीत कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यूरोपीय संघ के साथ यह समझौता भारत के निर्यात क्षेत्रों के लिए विकास के अभूतपूर्व अवसर पैदा करेगा। यह डील न केवल व्यापारिक संबंधों को बदलेगी, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक ब्लॉकों में से एक के साथ भारत की साझेदारी को नई ऊंचाई देगी।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत अब तक सात विकसित देशों के साथ सफल व्यापारिक समझौते कर चुका है। हालांकि, यूरोपीय संघ के साथ होने वाला यह समझौता अपनी व्यापकता और आर्थिक प्रभाव के कारण सबसे विशिष्ट होगा। उनके अनुसार, भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का आत्मविश्वास बढ़ाया है।
क्यों है यह ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’?
पीयूष गोयल ने तर्क दिया कि India-EU FTA एक ‘विन-विन’ स्थिति है क्योंकि दोनों अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करने के बजाय एक-दूसरे की पूरक हैं। भारत उन वस्तुओं का उत्पादन करता है जिनकी यूरोप को आवश्यकता है, और यूरोप के पास वह तकनीक और निवेश क्षमता है जिसकी भारत को अपनी विकास यात्रा में जरूरत है।
मंत्री ने पिछली सरकारों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पहले विकसित देशों के साथ समझौते करने में डर का माहौल रहता था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अब जोखिम लेने और साहसी निर्णय लेने में सक्षम है। उन्होंने भारत की तुलना एक स्टार्टअप से की, जो नवाचार और रिस्क लेने की क्षमता के साथ आगे बढ़ रहा है।
सभी 27 यूरोपीय देशों का मिला समर्थन
इस समझौते की सबसे बड़ी सफलता इसकी सर्वसम्मति में दिख रही है। गोयल ने जानकारी दी कि पिछले कुछ महीनों में हुई उच्च स्तरीय वार्ताओं के बाद, यूरोपीय संघ के सभी 27 सदस्य देशों ने इस साझेदारी के प्रति अपना उत्साह व्यक्त किया है। वर्तमान में एक भी ऐसा सदस्य देश नहीं है जो भारत के साथ इस व्यापारिक सौदे का विरोध कर रहा हो।
विदेशी राजनयिकों और राष्ट्राध्यक्षों के साथ हुई चर्चाओं में यह बात साफ हो गई है कि दुनिया अब भारत को एक उभरती हुई महाशक्ति के रूप में देख रही है। 140 करोड़ भारतीयों का भरोसा इस पूरी बातचीत की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है।
भारतीय उद्योगों और किसानों के हितों का संरक्षण
व्यापारिक लाभ की बात करते हुए गोयल ने देशवासियों को आश्वस्त किया कि किसी भी स्थिति में राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। India-EU FTA के तहत भारत विशेष रूप से कपड़ा, चमड़ा और हस्तशिल्प जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए ‘जीरो-ड्यूटी एक्सेस’ की मांग कर रहा है।
इसके अलावा, समझौते में भारतीय किसानों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए विशेष सुरक्षा उपायों (Safeguards) को शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के बीच घरेलू उत्पादकों के हितों को कोई नुकसान न पहुंचे।
आगामी भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन
इस दिशा में 27 जनवरी को होने वाला 16वां भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत आ रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के साथ होने वाली इस बैठक में व्यापार, सुरक्षा, रक्षा और क्लीन एनर्जी जैसे महत्वपूर्ण नीतिगत क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा होगी। 2024-25 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच माल का व्यापार लगभग 136.53 बिलियन डॉलर रहा है, जिसे इस समझौते के बाद दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।
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