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Pitru Paksha 2025: पितृपक्ष में क्यों अनिवार्य माने जाते हैं कुशा, तिल अक्षत और जौ

Pitru Paksha 2025

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Pitru Paksha 2025: हिंदू धर्म में पितृपक्ष को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। पितृपक्ष को श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है। कहा जाता है कि इस पक्ष के दौरान पूर्वजों का स्मरण करते हुए यदि उनके मोक्ष की प्रार्थना की जाए और कुछ विशेष उपाय किए जाएं तो पितरों को श्री चरणों में स्थान मिलता है। कहा जाता है कि इस अवधि में पितृ धरती पर आते हैं और वंशजो द्वारा किए गए उपायों का लाभ प्राप्त कर तृप्त होकर मोक्ष प्राप्त करते हैं। परंतु क्या आप जानते हैं कि पितृपक्ष के दौरान कुछ विशेष वस्तुओं का इस्तेमाल करने पर ही पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।

Pitru Paksha 2025

पितृपक्ष में क्या इस्तेमाल करने से सफल होता है तर्पण

जी हां, पितृपक्ष के दौरान हम कई प्रकार के उपाय करते हैं परंतु इन उपायों में कुछ वस्तुओं का इस्तेमाल करना अनिवार्य होता है जैसे कि कुशा, अक्षत,तिल और जौ। बिना इन वस्तुओं के कोई भी श्राद्ध अधूरा माना जाता है इसीलिए पितृपक्ष के दौरान पितरों के तर्पण के लिए इन वस्तुओं का इस्तेमाल अनिवार्य होता है और आज के इस लेख में हम आपको इन्हीं वस्तुओं से जुड़ी सारी जानकारी उपलब्ध कराएंगे जहां हम बताएंगे कि किस प्रकार इन वस्तुओं की महत्वता होती है और कैसे उपयोग करना चाहिए।

पितृपक्ष में इस्तेमाल की जाने वाली चार महत्वपूर्ण वस्तुएं

कुशा: पितृपक्ष में कुशा को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है। इस दर्भ घास भी कहते हैं। कहा जाता है कि यह घास विष्णु भगवान के माध्यम से धरती पर उत्पन्न हुई थी इसीलिए तर्पण के दौरान कुशा से बनाई गई अंगूठी पहनना अनिवार्य होता है। कुशा के माध्यम से अर्पित किया गया जल सीधा पितरों तक पहुंचता है और पितरों को शांति मिलती है।

तिल: पितृपक्ष में तिल का प्रयोग भी अनिवार्य माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार तिल का संबंध सीधा पितरों से होता है। तिल के उपयोग से पितृदोष निवारण होता है। तिल का दान शनि और राहु जैसे दोष को भी शांत करता है। ऐसे में शनि और राहु की वजह से ही पितृ दोष लगता है जिसके चलते यदि तर्पण के दौरान तिल का इस्तेमाल किया गया तो ग्रह शांत होते हैं और पितरों को तृप्ति मिलती है।

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अक्षत: अक्षत यानि अखंड चावल, अखंडित चावल का उपयोग पिंडदान करते समय किया जाता है। यह पितरों को सबसे प्रिय होते हैं क्योंकि पितरों को इन्हीं के माध्यम से तृप्ति मिलती है। जब अक्षत तर्पण के दौरान अर्पित किए जाते हैं तब पितरों का पेट भरता है और वह अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं इससे परिवार में समृद्धि होती है और पितृ दोष का नाश होता है।

जौ: पितृपक्ष में जौ का भी अत्यधिक महत्व होता है। कहा जाता है कि पितृपक्ष में जौ दान से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। जौ को हवन इत्यादि में भी इस्तेमाल किया जाता है जिसकी वजह से इसका आध्यात्मिक महत्व भी अत्यधिक होता है। ऐसे में तर्पण के दौरान जो अर्पित करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है।

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