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PGI-D 2025-26: MP का कोई जिला 60% तक नहीं पहुंचा, सीधी सबसे आगे; बड़े शहर पीछे

भोपाल। मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा की स्थिति को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की Performance Grading Index for Districts (PGI-D) 2025-26 रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े किए हैं। प्रदेश के 55 जिलों में से एक भी जिला 600 में 360 अंक यानी 60% का स्तर नहीं छू सका। सीधी ने मध्य प्रदेश में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन उसका स्कोर भी 333 अंक यानी 55.5% रहा।

रिपोर्ट में जिलों की शिक्षा व्यवस्था का आकलन 600 अंकों और 70 indicators के आधार पर किया गया है। इसमें बच्चों के learning outcomes, कक्षा में पढ़ाई, स्कूल की सुविधाएं, बच्चों की सुरक्षा, digital learning और school management जैसे कई पहलू शामिल हैं। इसके लिए UDISE+, PARAKH Rashtriya Sarvekshan 2024 और PRABANDH जैसे अलग-अलग सरकारी पोर्टल के डेटा का इस्तेमाल किया गया है।

सीधी MP में नंबर-1, लेकिन 60% से दूर

मध्य प्रदेश में सीधी 333 अंक के साथ पहले स्थान पर रही। इसके बाद उज्जैन 323, शाजापुर 318, दमोह 312 और नरसिंहपुर 307 अंक के साथ टॉप-5 में रहे। हालांकि, इनमें से कोई भी जिला 360 अंक तक नहीं पहुंच पाया। यानी राज्य का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला जिला भी 60% के benchmark से पीछे रहा।

बड़े शहरों से आगे निकले छोटे जिले

PGI-D की रिपोर्ट में जो प्रमुख बात सामने आई है कि मध्य प्रदेश के बड़े शहरों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा वही छोटे जिलों का प्रदर्शन बेहतर रहा।

प्रमुख जिलों के स्कोर इस तरह हैं:

यानी राजधानी भोपाल और आर्थिक राजधानी इंदौर भी राज्य के टॉप-5 जिलों में जगह नहीं बना सके।

45 जिले Prachesta-2 श्रेणी में

PGI-D में जिलों को उनके प्रदर्शन के आधार पर अलग-अलग grades दिए जाते हैं। मध्य प्रदेश के 45 जिले Prachesta-2 श्रेणी में रहे। वहीं 6 जिले Prachesta-1 और 4 जिले Prachesta-3 में शामिल हैं। सबसे कम स्कोर वाले जिलों में झाबुआ, अलीराजपुर, खरगोन और बड़वानी शामिल हैं।

किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत?

PGI-D में सिर्फ परीक्षा के रिजल्ट को नहीं देखा जाता। इसमें बच्चों की learning, कक्षा में पढ़ाई की गुणवत्ता, शिक्षकों की उपलब्धता, स्कूल की सुविधाएं, बच्चों की सुरक्षा, digital education और school management जैसे कई पहलू शामिल होते हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, PGI-D में 70 indicators को 11 domains में बांटा गया है। इनमें Learning Outcomes and Quality, Access Outcomes, Teacher Availability and Professional Development, Learning Management, Infrastructure, School Safety, Digital Learning, Funds Utilisation, Attendance Monitoring और School Leadership Development जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

प्रदेश में Digital Learning बड़ी चुनौती

रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के कई जिलों में Digital Learning अभी भी चुनौती बना हुआ है। कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों में डिजिटल शिक्षा की स्थिति और खराब रही।बड़वानी में Digital Learning का प्रदर्शन 16% और धार में करीब 20% बताया गया है। इससे साफ है कि सिर्फ स्कूल भवन और दूसरी सुविधाएं बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। बच्चों की learning, कक्षा में पढ़ाई की गुणवत्ता और digital resources के इस्तेमाल पर भी ध्यान देना जरूरी है।

रीवा का स्कोर 326, शहडोल आगे

विंध्य के लिहाज से देखें तो रीवा भी प्रदेश के टॉप जिलों में शामिल नहीं है। रिपोर्ट में रीवा का कुल स्कोर 326/600 दर्ज है। वहीं शहडोल ने 341 अंक हासिल किए हैं, जबकि सतना का स्कोर 324 अंक रहा। यानी विंध्य के जिलों के प्रदर्शन में भी अंतर दिखाई देता है। रिपोर्ट के आंकड़े यह सवाल खड़ा करते हैं कि अलग-अलग जिलों में शिक्षकों की उपलब्धता, स्कूल की सुविधाओं, कक्षा में पढ़ाई और बच्चों के learning outcomes की स्थिति में कितना अंतर है।

क्या है PGI-D?

PGI-D यानी Performance Grading Index for Districts केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का एक इंडेक्स है। इसके जरिए जिला स्तर पर स्कूली शिक्षा के प्रदर्शन का आकलन किया जाता है। 2025-26 में PGI-D का ढांचा 600 अंकों और 70 indicators पर आधारित है। इसका उद्देश्य जिलों की शिक्षा व्यवस्था में मौजूद कमियों को पहचानना और सुधार के क्षेत्रों को सामने लाना है।

MP के लिए क्या संकेत?

रिपोर्ट का सबसे बड़ा संकेत यह है कि मध्य प्रदेश का कोई भी जिला 60% के स्तर तक नहीं पहुंच पाया। सीधी राज्य में सबसे आगे रही, लेकिन वह भी 333 अंक तक ही पहुंच सकी। इससे साफ है कि राज्य के सामने सिर्फ स्कूलों की सुविधाएं बढ़ाने की चुनौती नहीं है। बच्चों की learning, कक्षा में पढ़ाई की गुणवत्ता, digital education और school management में सुधार भी जरूरी है।

मुख्य बिंदु:

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