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रीवा में गहराया ईंधन का संकट, पेट्रोल पंप संचालकों ने बिना सरकारी आदेश के तय की तेल की सीमा!

Petrol pump operators in Rewa fixed the oil limit without any government order!Petrol pump operators in Rewa fixed the oil limit without any government order!

Petrol pump operators in Rewa fixed the oil limit without any government order!

रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार हो रहे उछाल के बीच अब ईंधन की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। जिले में हालात इस कदर बिगड़ गए हैं कि बिना किसी सरकारी या आधिकारिक आदेश के ही कई पेट्रोल पंप संचालकों ने खुद ही ईंधन की बिक्री पर सीमा लागू कर दी है। इस मनमाने फैसले से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

वाहनों के लिए तय हुआ कोटा, पंपों पर टांगे गए बोर्ड
मिली जानकारी के अनुसार, पेट्रोल पंप संचालकों ने तेल देने का एक निश्चित कोटा तय कर दिया है। अब दोपहिया वाहनों को अधिकतम मात्र 200 रुपये का और चार पहिया वाहनों को केवल 1000 रुपये तक का ही पेट्रोल-डीजल दिया जा रहा है। संकट और सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुटेही स्थित एक पेट्रोल पंप पर तो इस नियम को लागू करने के लिए बाकायदा बोर्ड तक टांग दिया गया है। वहीं, कनौड़िया पेट्रोल पंप पर दोपहिया वाहनों के लिए तो छूट है, लेकिन डीजल की बिक्री पर सख्त लिमिट तय कर दी गई है।

प्रशासन बेखबर, पीएम की अपील का दिया जा रहा हवाला
हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन और जिला आपूर्ति नियंत्रक कार्यालय की तरफ से ऐसा कोई भी नियम या आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद पंप संचालक अपनी मर्जी से ईंधन की खपत पर अंकुश लगा रहे हैं। माना जा रहा है कि पंप संचालक इस कदम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में जनता से की गई ‘ईंधन का कम उपयोग करने’ की अपील से जोड़ रहे हैं और इसे उसी अपील का अनौपचारिक पालन बता रहे हैं।

जनता में भारी आक्रोश, वाहन चालक परेशान
पंप संचालकों के इस औचक और मनमाने फैसले के कारण स्थानीय जनता और वाहन चालकों में भारी नाराजगी और आक्रोश देखा जा रहा है। लंबी दूरी का सफर करने वाले लोगों और आपातकालीन स्थिति में फंसे चालकों को पूरी टंकी न भरवा पाने के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अब देखना यह होगा कि इस मनमानी पर जिला प्रशासन कब तक संज्ञान लेता है और आम जनता को इस संकट से कब राहत मिलती है।

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