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SGMH रीवा में संवेदनहीनता की हद, भीषण गर्मी में बिना कूलर तड़प रहे मरीज, ठंडी हवा के लिए वार्डों में हो रहे झगड़े

Patients suffering without coolers in the scorching heat at SGMH RewaPatients suffering without coolers in the scorching heat at SGMH Rewa

Patients suffering without coolers in the scorching heat at SGMH Rewa

रीवा। विंध्य के सबसे बड़े चिकित्सालय संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल (SGMH) में प्रबंधन की गंभीर लापरवाही और संवेदनहीनता का एक बड़ा मामला सामने आया है। रीवा में सूरज के तीखे तेवरों के कारण पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, लेकिन इस भीषण तपिश में भी अस्पताल की चौथी मंजिल पर भर्ती मरीजों के लिए स्थितियां किसी यातना गृह जैसी बन चुकी हैं। यहां गर्मी से राहत देने के लिए लगाए गए कूलर पूरी तरह से कबाड़ और खराब पड़े हैं, जिसके कारण मरीज और उनके तीमारदार पसीने से तर-बतर होकर तड़पने को मजबूर हैं।

4 दिन पहले लिखित शिकायत, फिर भी प्रबंधन मौन
अस्पताल की इस बदहाली को लेकर वार्ड स्टाफ द्वारा चार दिन पहले ही जिम्मेदार अधिकारियों को लिखित शिकायत दी जा चुकी है। बताया जा रहा है कि शिकायत के बाद कुछ मैकेनिकों ने अस्पताल का दौरा भी किया, लेकिन इसके बावजूद अब तक मरम्मत का कार्य पूरा नहीं किया जा सका है। वर्तमान में हालात यह हैं कि विशाल वार्डों में महज इक्का-दुक्का कूलर ही चालू हालत में हैं। इन गिने-चुने कूलरों की ठंडी हवा पाने के लिए अब मरीजों और उनके परिजनों के बीच विवाद और आपसी झगड़े की नौबत आ रही है।

मरीजों और परिजनों में भारी आक्रोश, व्यवस्था पर उठे सवाल
अस्पताल प्रशासन के इस उदासीन और लापरवाह रवैये को लेकर मरीजों के परिजनों में भारी आक्रोश व्याप्त है। तीमारदारों का कहना है कि एक तरफ तो मरीज पहले से ही गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस अमानवीय माहौल ने उनकी तकलीफ को कई गुना बढ़ा दिया है। अस्पताल परिसर में लोग अब खुलेआम यह सवाल उठा रहे हैं कि जिस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भीषण तपिश के दौरान हवा जैसी बुनियादी सुविधाएं ही नदारद हैं, वहां मरीजों के इलाज और उनके जीवन की सुरक्षा का क्या भरोसा किया जाए?

अमानवीय स्थिति पर चुप हैं जिम्मेदार
इतनी विकट और अमानवीय स्थिति पैदा होने के बाद भी संजय गांधी अस्पताल का जिम्मेदार प्रबंधन मौन साधे बैठा है। वार्डों में भर्ती छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को हाथ के पंखों से हवा करनी पड़ रही है। देखना होगा कि इस गंभीर लापरवाही पर उच्च प्रशासन कब जागता है और तड़पते मरीजों को कब राहत मिलती है।

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