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संसद का विशेष सत्र बुला सकती है सरकार, परिसीमन और लोकसभा की सीटें बढ़ाने वाले बिल पर नजर

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर सकती है। इस सत्र में परिसीमन विधेयक, लोकसभा की सीटें बढ़ाने से जुड़ा विधेयक और केंद्र शासित प्रदेशों के कानूनों में संशोधन से संबंधित विधेयक पेश किए जा सकते हैं। इन विधेयकों का महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया से भी संबंध है।

इससे पहले 16 और 17 अप्रैल 2026 को सरकार लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक को जरूरी दो-तिहाई बहुमत से पारित कराने में नाकाम रही थी। अब सरकार दोबारा इन विधेयकों को आगे बढ़ाने के लिए समर्थन जुटाने में लगी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार को उम्मीद है कि इस बार जरूरी बहुमत हासिल किया जा सकता है। हालांकि, विशेष सत्र बुलाने को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा की पुष्टि जरूरी है।

लोकसभा में बहुमत से 42 सांसद पीछे सरकार

लोकसभा में परिसीमन और सीटें बढ़ाने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, NDA के पास फिलहाल 318 सांसदों का समर्थन है, जबकि सभी 540 सदस्यों के मतदान करने की स्थिति में दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 वोट चाहिए होंगे।

इस हिसाब से सरकार को 42 अतिरिक्त सांसदों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में सरकार के लिए विपक्षी दलों और अन्य क्षेत्रीय पार्टियों का समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है।

राज्यसभा में भी समर्थन जुटाने की चुनौती

परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को कानून बनाने के लिए दोनों सदनों में आवश्यक समर्थन हासिल करना होगा। ऐसे में राज्यसभा में भी सरकार की रणनीति महत्वपूर्ण होगी।

संविधान संशोधन विधेयक के लिए राज्यसभा में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन के साथ सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत की शर्त भी पूरी करनी होती है।

इसलिए सरकार के सामने केवल लोकसभा में संख्या जुटाने की चुनौती नहीं है। राज्यसभा में भी जरूरी समर्थन हासिल करना होगा।

DMK को साथ लाने की कोशिश

परिसीमन विधेयक को लेकर DMK के रुख पर भी नजर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ समर्थन जुटाने की संभावनाओं पर विचार कर रही है।

DMK ने पहले परिसीमन की प्रस्तावित व्यवस्था पर आपत्ति जताई थी। पार्टी की चिंता दक्षिण भारतीय राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर रही है। हालांकि, बाद की रिपोर्टों में पार्टी के रुख को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

DMK के 22 लोकसभा सांसदों का समर्थन मिलने पर भी सरकार को दो-तिहाई बहुमत के लिए अतिरिक्त सांसदों की जरूरत होगी। इसलिए सरकार अन्य छोटे दलों और गैर-NDA सांसदों का समर्थन हासिल करने की कोशिश भी कर सकती है।

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