Parents looked dissatisfied in the book fair organized in Rewa: रीवा के मानसभवन में जिला प्रशासन की तरफ से पुस्तक मेले का आयोजन किया गया। जिसमें शहर में निजी संचालित स्कूलों की किताबों को डिस्काउंट में देने का दावा किया गया। इस पुस्तक मेले में कई किताब-कॉपी बेचने वाली दुकानों के स्टाल लगे, काफी संख्या में लोग किताब-कॉपियां लेने के लिए पहुंचे लेकिन ज्यादातर अभिवावक इस आयोजन से संतुष्ट नहीं रहे, क्योंकि उन्हें जिन स्कूलों की किताबें चाहिए थी वो मिल ही नहीं पाईं। इसके लिए उन्हें दुकान जाने के लिए ही कहा गया। पुस्तक मेले में लोगों ने सिर्फ 10 फीसदी डिस्काउंट के साथ कॉपियां ही खरीदी।
हालांकि कुछ ही स्टाल में अभिवावकों को उनके बच्चों के स्कूल के सिलेबस के अनुसार किताबें मिलीं। दावा यह किया गया था कि हर स्टाल में हर स्कूल की किताब मिलेगी लेकिन आलम यही रहा कि जिनसे स्कूलों की सांठ-गांठ है उनकी ही स्टॉल में उन स्कूलों की किताबें मिल रही थीं वो भी पूरी नहीं।लोगों ने कहा इससे अच्छा तो दुकान से जाकर ही किताबें ले लेते इतना डिस्काउंट तो दुकानों में भी मिल जाता है। इस पुस्तक मेले का मुआयना करने के लिए रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल भी पहुंची, उन्होंने क्या मुआयना किया समझ से परे है।
जब हमारे रिपोर्टर ने उनसे जबलपुर कलेक्टर के आदेश के तर्ज पर NCRT की किताबों को सभी स्कूलों में लागू करने से जुड़ा सवाल किया तो उन्होंने कोई खास जवाब नहीं दिया। कुलमिलाकर इस पुस्तक मेले को उसी स्कैम का हिस्सा माना गया जैसा की स्कूल और किताब बेचने वाली दुकानों के जरिये होता है। प्रशासन ऐसा होने से रोक नहीं पा रहा है। इस बुक फेयर को लेकर हमारी पूरी रिपोर्ट आप हमारे चैनल में देख सकते हैं।