छत्तीसगढ़। पंडवानी गायिका एवं पद्म विभूषण तीजन बाई का 70 साल की आयु में निधन हो गया। उन्होने शनिवार रात 3.15 बजे रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से बीमार थीं। रविवार को तीजन बाई के शव को उनके पैतृक गांव गनियारी लाया गया, जहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
पंडवानी गायन को दिलाई वैश्विक पहचान
तीजन बाई ने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली से छत्तीसगढ़ की लोक कला और पंडवानी गायन को वैश्विक पहचान दिलाई थी। भारतीय लोक कला में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वाेच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। महाभारत की कथाओं को सुनाने की प्रेरणा उन्हें नाना से मिली थी।
कौन थी तीजन बाई
तीजन बाई का जन्म 8 अगस्त 1956 को छत्तीसगढ़ के दुर्ग ज़िले के गनियारी गाँव में हुआ था। तीजन बाई छत्तीसगढ़ की एक पारंपरिक प्रदर्शन कला, पांडवनी की प्रतिपादक थीं, जिसमें वह संगीत की संगत के साथ महाभारत की कहानियों का मंचन करती थीं, हालांकि उन्होंने कभी औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की, फिर भी उन्होंने पांडवनी शैली में कथा कहने में महारत हासिल कर ली है और अपने गायन और तंबूरा वादन का उपयोग करके महाभारत की कहानियों को दर्शकों के लिए जीवंत कर देती हैं।
क्या है पंडवानी
पंडवानी कला मुख्य रूप से पुरुषों द्वारा गाई जाती थी, लेकिन उन्होंने इस वर्जना को तोड़ा और कापालिक शैली में खड़े होकर प्रदर्शन करने वाली पहली महिला बनीं। पांडवनी का शाब्दिक अर्थ है महाभारत के पौराणिक बंधुओं, पांडवों की कहानियाँ या गीत और इसमें मुख्य गायक एक हाथ में छोटी घंटियों और मोर पंखों से सजा हुआ एकतारा या तंबूरा (तार वाला वाद्य यंत्र) लेकर महाकाव्य के एक प्रसंग (जिसे प्रसंग कहते हैं) का अभिनय और गायन करता है।
तीजनबाई को मिले ये सम्मान
गायिका तीजन बाई को पद्म श्री 1988, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1995, पद्म भूषण 2003, फुकोका पुरस्कार 2018 में तथा पद्म विभूषण 2019 प्राप्त हुआ था।
पीएम मोदी ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के निधन पर शोक जताया। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में पहचान दिलाई। उनका जाना कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।’ छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि पंडवानी के जरिए उन्होंने देश-विदेश में राज्य का नाम रोशन किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा है कि अद्वितीय प्रतिभा की धनी तीजन बाई ने अपनी कला और ओजस्वी प्रस्तुतियों के माध्यम से लोक परंपराओं का संरक्षण किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति और पंडवानी गायन को वैश्विक पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई। कला जगत में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

