नई दिल्ली। पाकिस्तान में ड्रोन उत्पादन और तकनीक को लेकर गतिविधियां तेज होती दिख रही हैं। अमेरिकी ड्रोन कंपनी Powerus ने सितंबर में पाकिस्तान की सेना के साथ ड्रोन से जुड़ा समझौता किया था। कंपनी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप से जुड़े निवेश से भी जोड़ा जाता है। हालांकि, कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप के बेटे कंपनी के संचालन या ठेकों में सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं।
16 सितंबर को Powerus के सह-संस्थापक ब्रेट वेलिकोविच के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर से रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर में मुलाकात की। इसके बाद Powerus ने बताया कि उसे पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय से मानव रहित हवाई प्रणालियों से जुड़ा शुरुआती ऑर्डर मिला है। ऑर्डर की कीमत और ड्रोन के मॉडल की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
पाकिस्तान में उत्पादन यूनिट लगाने की तैयारी?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक Powerus पाकिस्तान में ड्रोन की उत्पादन क्षमता विकसित करने के विकल्प तलाश रही है। रिपोर्ट में हरिपुर, रावलपिंडी और तक्षशिला को संभावित जगहों के तौर पर बताया गया है। हालांकि, इन जगहों पर उत्पादन यूनिट लगाने या यहां आत्मघाती ड्रोन बनाने को लेकर अभी तक Powerus या पाकिस्तानी सेना की ओर से सार्वजनिक तौर पर विस्तृत पुष्टि नहीं की गई है।
Powerus के अधिकारियों ने Reuters से कहा था कि कंपनी पाकिस्तान में तकनीक विकसित करने और दोनों देशों के बीच संयुक्त तकनीकी साझेदारी की संभावनाएं तलाश रही है। कंपनी के मुताबिक पाकिस्तान का निजी रक्षा क्षेत्र अभी विकास के दौर में है।
ट्रंप के बेटों का Powerus से क्या संबंध है?
Powerus का Aureus Greenway Holdings के साथ विलय 1 अक्टूबर 2026 को पूरा हो चुका है। इसके बाद कंपनी का नाम Powerus Corporation हो गया और यह Nasdaq पर PUSA नाम से कारोबार कर रही है।
अमेरिकी नियामकीय दस्तावेजों के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप से जुड़ी निवेश कंपनी American Ventures की संयुक्त कंपनी में करीब 9.9% हिस्सेदारी रहने की उम्मीद जताई गई थी। ट्रंप परिवार की ओर से कहा गया है कि उनका निवेश निष्क्रिय है और Powerus के कारोबार या पाकिस्तान के साथ हुए समझौते में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। व्हाइट हाउस ने भी हितों के टकराव से इनकार किया है।
तुर्किये ने भी पाकिस्तान के साथ किया ड्रोन समझौता
इसी बीच पाकिस्तान ने तुर्किये के साथ भी ड्रोन उत्पादन को लेकर बड़ा समझौता किया है। 18 सितंबर को तुर्किये की कंपनी और पाकिस्तान की रक्षा संस्था NRTC के बीच स्थानीय असेंबली और उत्पादन का समझौता हुआ।
समझौते में 1 लाख FPV कामिकाजे ड्रोन, 10 मानवरहित हेलिकॉप्टर, 25 मिनी मानवरहित हेलिकॉप्टर, 500 सामरिक कामिकाजे सिस्टम और 250 स्वायत्त जमीनी सहायता एवं निगरानी इकाइयां शामिल हैं। समझौते की अवधि तीन साल बताई गई है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
पाकिस्तान अगर ड्रोन की खरीद के साथ भविष्य में अपनी उत्पादन क्षमता भी बढ़ाता है तो भारत की पश्चिमी सीमा पर ड्रोन निगरानी, हथियार पहुंचाने और हमले की चुनौती बढ़ सकती है। खास बात यह है कि पाकिस्तान के साथ समझौता करने वाली अमेरिकी कंपनी Powerus का भारत से भी रक्षा संबंध है। जून 2026 में Powerus की सहायक कंपनी Tandem Defense ने भारतीय कंपनी Paras Defence को Guardian-1 काउंटर-ड्रोन सिस्टम के भारत में निर्माण और बिक्री के विशेष अधिकार दिए थे। Guardian-1 को ड्रोन, ड्रोन स्वार्म और एकतरफा हमले वाले ड्रोन को रोकने के लिए बनाया गया है। यानी एक ही अमेरिकी कंपनी से जुड़ी तकनीक का इस्तेमाल भारत में ड्रोन रोकने और पाकिस्तान के साथ ड्रोन क्षमता बढ़ाने दोनों संदर्भों में सामने आया है।
भारत भी तैयारी बढ़ा रहा है
भारतीय वायुसेना ने सितंबर 2026 में पोखरण में Dronathon-2026 आयोजित किया, जिसमें स्वदेशी ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीकों का परीक्षण और प्रदर्शन किया गया। इसमें ड्रोन स्वार्म, निगरानी, स्वायत्त संचालन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसी तकनीकों पर भी फोकस रहा। इसके अलावा भारत में Guardian-1 जैसे काउंटर-ड्रोन सिस्टम का स्थानीय उत्पादन शुरू करने की दिशा में भी काम हो रहा है। यानी पाकिस्तान की बढ़ती ड्रोन क्षमता के जवाब में भारत सिर्फ पारंपरिक एयर डिफेंस पर निर्भर नहीं है, बल्कि ड्रोन, काउंटर-ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और स्वदेशी तकनीक का पूरा नेटवर्क मजबूत करने पर जोर दे रहा है।

