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क्या आप ऑप्शन ट्रेडिंग करते हैं? यदि हाँ; तो जान लो क्या बदलने वाला है!

Stock market screen showing rising charts representing auto ancillary sector performance

Stock Option Trading: अगर आप भी Option Trading करते हैं तो ऑप्शन ट्रेडर्स के लिए कल से लॉट साइज़ बदलने वाला है. फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग के लिए लॉट साइज़ बहुत महत्वपूर्ण है, इससे फंड इंवॉलव्ड और पोज़ीशन साइज़ के साथ साथ रिस्क मैनेजमेंट भी बदल जाता है. ये सभी फैक्टर्स जनवरी 2026 सीरीज़ से बदलने वाले हैं.

NSE ने दी जानकारी

NSE ने बताया कि F&O सेगमेंट के ट्रेडर्स को सूचित किया जाता है कि Nifty, Bank Nifty और दो अन्य इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए रिवाइज़्ड लॉट साइज, जैसा कि पहले के NSE सर्कुलर में बताया गया था, जनवरी 2026 के कॉन्ट्रैक्ट्स से प्रभावी होंगे. हालांकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने इन बदलावों की घोषणा पहले ही कर दी थी, लेकिन अब ये दिसंबर 2025 के बाद की एक्सपायरी साइकिल से लागू होंगे, जिससे जनवरी 2026 सीरीज और उसके बाद के सभी कॉन्ट्रैक्ट्स प्रभावित होंगे.

जानिए रिवाइज़्ड लॉट साइज़

Nifty 50 के लॉट साइज को 75 यूनिट से घटाकर 65 यूनिट कर दिया जाएगा. निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयर 65 से घटकर 60 यूनिट हो जाएंगे. निफ्टी मिडकैप सेलेक्ट का मूल्य 140 से घटाकर 120 यूनिट किया जाएगा. Nifty Next 50 सहित अन्य इंडेक्स के लिए लॉट साइज अपरिवर्तित रहेंगे.

गौरतलब है कि, इस बदलाव से दिसंबर 2025 में समाप्त होने वाली वीकली और मंथली कॉन्ट्रैक्ट प्रभावित नहीं होगा. यह रिवाज़्ड लॉट साइज़ जनवरी 2026 में समाप्त होने वाली वीकली और मंथली एक्सपायरी से लागू होंगे, जिनमें त्रैमासिक और अर्धवार्षिक डेरिवेटिव जैसे लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट भी शामिल हैं.

वीकली डेरिवेटिव के लिए वर्तमान लॉट साइज़ के बाद एक्सपायर होने वाला फाइनल कॉन्ट्रैक्ट 23 दिसंबर 2025 को एक्सपायर हो चुका है. लॉट साइज़ में बदलाव 6 जनवरी 2026 को समाप्त होने वाले अगले वीकली कॉन्ट्रैक्ट से प्रभावी होंगे. मंथली कॉन्ट्रैक्ट के मामले में अपडेट लॉट साइज़ 27 जनवरी 2026 की एक्सपायरी डेट से लागू होंगे , जो 30 दिसंबर 2025 की एक्सपायरी डेट के बाद है.

NSE ने ये भी दी जानकारी

इसके अतिरिक्त NSE ने पुष्टि की है कि त्रैमासिक और अर्धवार्षिक अनुबंध भी 30 दिसंबर 2025 को दिन के अंत से संशोधित लॉट साइज़ अपनाएंगे. मार्च 2026 का कॉन्ट्रैक जिसे मूल रूप से त्रैमासिक समाप्ति के रूप में लॉन्च किया गया था, दिसंबर 2025 के मंथली साइकिल के अंत से नए लॉट साइज़ सिस्टम के तहत दूर-मंथली कॉन्ट्रैक्ट के रूप में माना जाएगा.

क्या पड़ेगा निवेशकों पर असर

आपको बता दें NSE के इस फैसले का असर निवेशकों पर जरूर पड़ेगा लेकिन दो तरह से मतलब जो कम लॉट साइज चाहते थे या कम मात्रा में ट्रेड करना चाहते थे तो उनके लिए यह अच्छी पहल होगी और उनके लिए फायदेमंद रहेगा अब उन्हें मन मुताबिक ट्रेड करने का मौका मिल जायेगा.

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