Site iconSite icon SHABD SANCHI

महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर! उद्धव के 6 सांसद NDA में शामिल होंगे?

Operation Tiger Maharashtra/ Shiv sena UBT 6 MP Joining Shiv Sena Shinde: अबकी बार 400 पार! भले ही लोकसभा चुनाव में NDA ने 400 सीटों का मुकाम हासिल नहीं किया लेकिन ऐसा लगता है कि अगला चुनाव आते आते NDA अपने इस दावे को सच करके ही मानेगी। आम आदमी पार्टी (AAP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के टूटने के बाद एक बार फिर से शिवसेना UBT टूटने के कगार पर पहुंच गई है. महाराष्ट्र में शिंदे की शिवसेना ने ऑपरेशन टाइगर (Operation Tiger Maharashtra) शुरू किया है जिसे लेकर यह दावा किया जा रहा है कि UBT के 9 सांसदों में से 6 बागी बागी हो गए हैं और शिंदे की शिवसेना में शामिल होने जा रहे हैं. यानी ये 6 सांसद भी NDA का हिस्सा हो सकते हैं। और NDA सांसदों को संख्या बढ़कर 318 पहुंच सकती है जो पहले 292 थी, जो TMC के सांसदों के जुड़ने के बाद 312 पहुंच गई है.

उद्धव ठाकरे की शिवसेना में 4 साल के अंदर यह दूसरी बार टूट पड़ी है. 2022 में एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के 55 में से 40 विधायक अपने पाले में ले लिए थे और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली थी बाद में उन्होंने पार्टी का नाम और सिंबल भी अपने नाम कर लिया था. उद्धव ठाकरे इस झटके से पूरी तरह बाहर भी निकल पाए थे कि एकनाथ शिंदे ने उन्हें दूसरा झटका भी दे दिया। अगर शिवसेना के बागी विधायक शिंदे गुट में चले जाते हैं तो UBT के पास अब सिर्फ 3 सांसद और 20 विधायक ही रह जाएंगे।

संजय राउत ने बागी सांसदों को दी गाली

इधर UBT के राज्य सभा सांसद संजय राउत इस बात से काफी नाराज हैं. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर बागी सांसदों को गाली दी. उन्होंने यह भी कहा कि ये लोग बईमान हैं, बेईमानी इनके खून में हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी छोड़ने वाले सांसदों ने 15 करोड़ रुपए लेकर दल बदला है.

खबर है कि UBT के 6 बागी सांसदों ने बुधवार को सुबह 9:30 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी भेजी है। इस चिठ्ठी में भाऊसाहब वाकचौरे, नागेश पाटिल, संजय दीना, संजय हरिभाऊ, ओमप्रकाश राजे और संजय देशमुख के नाम हैं और मजेदार बात ये है कि इस चिठ्ठी के भेजे जाने से पहले संजय दीना पाटिल ने कहा था कि मैं UBT में ही रहूँगा।

खैर इससे पहले ये बागी सांसद लोकसभा स्पीकर से मिल पाते, संजय राउत ओम बिड़ला से मिलने पहुंच गए. उन्होंने कहा कि- स्पीकर ने भरोसा दिलाया है कि इस मामले में कानून, नियमों और संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखकर ही फैसला लिया जाएगा।

राउत ने दी सफाई

बागी सांसदों को गाली देने के मामले में भी उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि- मराठी में ऐसे शब्द आम बोलचाल का हिस्सा हैं। लेकिन पार्टी छोड़ने वाले सांसदों ने 15 करोड़ रुपए लेकर दल बदला है, ऐसे लोगों के लिए फूल नहीं बरसाए जा सकते।

इधर संजय राउत के द्वारा सांसदों को गाली देने के मामले में शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कहा कि UBT के सांसदों में असंतोष और नाराजगी है. संजय राउत ने अपने सांसदों को गाली दी है, बिकाऊ कहा है. उनके पास नेतृत्व में काम करने की क्षमता नहीं है।”

इधर बीजेपी MLA आशीष राओ देशमुख ने अलग दावा कर दिया उन्होंने कहा कि- संजय राउत चाहते हैं कि UBT के सभी सांसद और विधायक और NCP शरद पवार के सभी सांसद और विधायक ये कांग्रेस में विलीन हो जाएं ताकि उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया जाए.

इधर उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी के सांसदों को लगातार मनाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनसे सम्पर्क ही नहीं हो पा रहा है. खबर है कि पार्टी ने 18 जून को दिल्ली में बैठक बुलाई है और सभी सांसदों से कहा गया है कि जो इस बैठक में नहीं पहुंचेगा उनके खिलाफ डिसक्वालिफ़िकेशन की कार्रवाई की जाएगी।

“हालांकि यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि बागी सांसदों की संख्या 6 बताई जा रही है, जो शिवसेना UBT के 9 सांसदों का दो-तिहाई हिस्सा है। ऐसे में बागी सांसद दसवीं अनुसूची के तहत विलय का दावा कर सकते हैं। यदि लोकसभा अध्यक्ष उनके दावे को स्वीकार कर लेते हैं, तो दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी स्थिति मजबूत हो सकती है. हालांकि इस पर अंतिम फैसला स्पीकर के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि शिवसेना UBT के कितने सांसद टूटते हैं, बल्कि सवाल यह है कि क्या उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी को एक और बड़ी टूट से बचा पाएंगे? 2022 में विधायक गए, पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह गया, और अब अगर सांसद भी चले जाते हैं तो उद्धव ठाकरे की राजनीतिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।

दूसरी तरफ NDA लगातार अपना कुनबा बढ़ाता नजर आ रहा है। पहले आम आदमी पार्टी में बगावत, फिर तृणमूल में और अब शिवसेना UBT में संभावित विभाजन। ऐसे में विपक्ष की एकता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

फिलहाल सबकी नजर लोकसभा स्पीकर के फैसले पर है। देखना होगा कि इन बागी सांसदों को कानूनी मान्यता मिलती है या नहीं। लेकिन इतना तय है कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ चुका है. क्या उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी को बचा पाएंगे, या फिर शिंदे का ऑपरेशन टाइगर शिवसेना UBT को एक और बड़ा झटका देगा? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए। और ऐसी ही खबरों के लिए शब्द साँची को सब्स्क्राइब जरूर कीजिये

Exit mobile version