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MP: जीआरपी का ‘ऑपरेशन हमदर्द’ बना बेसहारा लोगों की उम्मीद, दो दिन में 235 लोगों का तैयार हुआ डिजिटल रिकॉर्ड

Operation Hamdard: अभियान के दौरान चिन्हित किए गए जरूरतमंदों में से करीब 40 प्रतिशत लोगों को रैन बसेरों (Shelter Home) में सुरक्षित पहुंचाया गया, जबकि अन्य पात्र व्यक्तियों को संबंधित विभागों के माध्यम से सरकारी योजनाओं (Government Schemes) और आवश्यक सहायता से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई।

Operation Hamdard: मध्य प्रदेश के रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले बेसहारा, भिक्षुक, निराश्रित, महिलाओं और बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षा और जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया जीआरपी का ‘ऑपरेशन हमदर्द’ (Digital Survey) असर दिखाने लगा है। अभियान के शुरुआती दो दिनों में ही प्रदेश के विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले 235 लोगों का डिजिटल रिकॉर्ड (Digital Record) तैयार किया गया है।

दो दिन में 235 लोगों का तैयार हुआ रिकॉर्ड

जीआरपी के मुताबिक, अभियान के पहले दिन यानी 1 जुलाई को 150 लोगों का रिकॉर्ड तैयार किया गया, जबकि 2 जुलाई को शाम छह बजे तक 85 अन्य लोगों का विस्तृत विवरण डिजिटल रूप से दर्ज किया गया। इस दौरान प्रत्येक व्यक्ति की पहचान और आवश्यक जानकारी सुरक्षित की गई, जिससे भविष्य में जरूरत पड़ने पर त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

भिक्षुकों, महिलाओं और बच्चों की जुटाई गई जानकारी

अभियान के दौरान जीआरपी की टीमों ने रेलवे स्टेशन परिसर में रहने वाले भिक्षुकों, निराश्रित व्यक्तियों, महिलाओं और नाबालिग बच्चों से संपर्क कर उनका पूरा विवरण एकत्र किया। सर्वे के दौरान जिन लोगों को तत्काल आश्रय की आवश्यकता थी, उनमें से करीब 40 प्रतिशत को रैन बसेरों (Shelter Home) में भेजा गया, जबकि अन्य जरूरतमंदों को संबंधित विभागों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई गई।

देश में अपनी तरह का पहला डिजिटल सर्वे

अधिकारियों के अनुसार, रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले लोगों का इस स्तर पर डिजिटल सर्वे (Digital Initiative) शुरू करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। इस पहल का उद्देश्य न केवल जरूरतमंदों का पुनर्वास करना है, बल्कि रेलवे परिसरों में होने वाली चोरी, अपराध और असामाजिक गतिविधियों पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।

हर साल जुलाई और जनवरी में चलेगा अभियान

रेलवे स्टेशनों पर बड़ी संख्या में फ्लोटिंग पॉपुलेशन (Floating Population) रहती है, जिनका कोई स्थायी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होता। ऐसे लोगों की पहचान और रिकॉर्ड तैयार करने के लिए अब यह विशेष अभियान हर वर्ष जुलाई और जनवरी में नियमित रूप से संचालित किया जाएगा। इससे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ-साथ जरूरतमंद लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ भी आसानी से पहुंच सकेगा।

एडीजी बोले- अपराध नियंत्रण और पुनर्वास में मिलेगी मदद

एडीजी (रेलवे) राजाबाबू सिंह ने कहा कि इस अभियान से रेलवे स्टेशनों और आसपास सक्रिय अपराधियों पर निगरानी रखना आसान होगा। साथ ही बेसहारा बुजुर्गों, अनाथ बच्चों, महिलाओं और मजदूरों की पहचान कर उन्हें सरकारी योजनाओं और पुनर्वास सुविधाओं से जोड़ने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन हमदर्द (Operation Hamdard) रेलवे स्टेशनों को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।

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