विशेष। समय-समय पर आकाश में अद्रभूद खगोलीय घटनाएं नजर आती है। यह एक दुलर्भ संयोग न सिर्फ होता है बल्कि वैज्ञानिकों के लिए खास होता है। जानकारों के अनुसार 31 मई की रात आसमान में एक बेहद दुर्लभ खगोलीय घटना ब्लू माइक्रोमून दिखाई देगी, यह इस साल का सबसे छोटा और सबसे कम चमकीला पूर्णिमा का चंद्रमा होगा। खगोलीय वैज्ञानिकों एवं आम जन के लिए यह एक अच्छा अवसर बनने जा रहा है, जब खुले आसमान में ब्लू मून के इस खास नजरें को देख पाऐगे।
ब्लू मून
कैलेंडर माह में पड़ने वाली दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहते हैं इस महीने की पहली पूर्णिमा 1 मई को थी नाम के बावजूद चांद का रंग नीला नहीं होगा, वह सामान्य सफेद या हल्के नारंगी रंग का ही चमकेगा।
माइक्रोमून
जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी पर होता है, तब वह माइक्रोमून कहलाता है। इस वजह से चांद सामान्य पूर्णिमा की तुलना में लगभग 5-6 प्रतिशत छोटा और 10 प्रतिशत कम चमकीला दिखाई देगा।
दुर्लभ संयोग
ब्लू मून और माइक्रोमून का एक साथ होना एक बेहद विरल खगोलीय घटना है। इस खूबसूरत नजारे को देखने के लिए किसी विशेष उपकरण (जैसे दूरबीन) की जरूरत नहीं है। आप इसे शाम के समय गोधूलि बेला या चंद्रोदय के दौरान नंगी आंखों से देख सकते हैं। शहर की तेज रोशनी और प्रदूषण से दूर किसी खुले, ऊंचे स्थान (छत या मैदान) पर जाएं, जहां से पूर्वी क्षितिज साफ दिखाई दे। यह अद्भुत नजारा शानदार फोटोग्राफी के लिए एक बेहतरीन अवसर है।

