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Middle East war से Oil Prices में Inflation बढ़ा…

Oil Prices Surge: Inflation Risks Increase

Oil Prices Surge: Inflation Risks Increase

Oil Prices Surge Inflation due to middle east war: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 10 से13 प्रतिशत तक का उछाल देखा गया। जब मध्य पूर्व देशों में तनाव के कारण, Strait of Hormuz के जरिए आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ती जा रही है जिसके कारण इसके दामों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। यह तेजी मार्च 2026 के पहले ही सप्ताह में देखी गई है जिसका सीधा असर वैश्विक inflation और सभी ऊर्जा आयात देश की लागत पर देखने को मिल सकता है।

तेल बाजार में तेजी और Inflation का दबाव

स्टॉक एक्सचेंज डाटा कमोडिटी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के अनुसार ब्रेड कुड की कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गई है जो पिछले कई हफ्तों के लेवल से हाई लेवल है। इंट्राडे ट्रेडिंग में या लगभग 13% तक का उछाल देखा गया है निवेश करने वाले लोगों के अनुसार यदि आपूर्ति बाधित रहती है तो इन्फ्लेशन का दबाव बढ़ सकता है खास तौर पर उन सभी अर्थव्यवस्था पर जो तेल के आयात पर ही निर्भर करते हैं। ऊर्जा की कीमत में वृद्धि होने से आमतौर पर परिवहन निर्माण और खाद आपूर्ति श्रृंखला की लागत बढ़ती है जिससे खुदरा महंगाई दर पर असर पड़ता है। यही कारण है कि बाजार में इंफ्लेशन संकेतकों को लेकर लोग सतर्क नजर आ रहे हैं।

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बढ़त के क्या है प्रमुख कारण

मिडिल ईस्ट के देशों में जारी भू राजनीतिक तनाव होने के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चित का माहौल बना हुआ है यह मार्ग फिरोज आना वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20% तेल आयात करता है किसी भी अवरोध होने की आशंका से फ्यूचर्स मार्केट में खरीदारी बढ़ जाती है। ऊर्जा निर्यातक देशों के संगठन OPEC की ओर से फिलहाल इसके प्रोडक्शन को बढ़ाने को लेकर कोई भी घोषणा नहीं की गई है कंपनी के ऑफिशियल बयान में कहा गया है कि वह बाजार की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

तेल आयात पर विशेषज्ञ की सलाह

कमोडिटी विश्लेषकों के अनुसार यदि ब्रेड क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के लेवल को छू लेता है तो वैश्विक इन्फ्लेशन के दरों में 0.3% से लेकर 0.5% तक का एक्स्ट्रा दबाव देखा जा सकता है हालांकि यह हनुमान मौजूदा हालात को देखते हुए बताया जा रहा है और इसमें बदलाव होना भी संभव है। कुछ ब्रोकरेज रिपोर्टेड के अनुसार तेल की कीमत में अस्थिरता होने से केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति भी प्रभावित हो सकती है क्योंकि inflation नियंत्रण होने से उनकी प्राथमिकता बनी हुई है।

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निवेश करने वाले लोग और बाजार पर इसका क्या असर

ऊर्जा कंपनी के शेयर में मजबूती देखी जा रही है जबकि एविएशन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में इसका दबाव दिख रहा है। कच्चे तेल की कीमत में भी तेजी होने से आयात बिल बढ़ सकता है जिससे चालू खाता घाटा प्रभावित होने का खतरा है। यह निवेश की सलाह नहीं है बल्कि मौजूदा बाजार की उपस्थिति का विश्लेषण है। बाजार की दिशा काफी हद तक भू राजनीतिक घटनाक्रम और आपूर्ति की स्थिरता पर ही निर्भर करती है अगर तनाव कम होता है और सप्लाई सामान्य रहती है तो कीमतों में स्थिरता फिर वापस लौट आएगी।

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