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ओडिशा में मृत बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचने वाले आदिवासी व्यक्ति को बैंक ने बकाया पैसे लौटाए। सीएम मोहन माझी ने घटना पर दुख जताते हुए जांच के आदेश दिए हैं।

Tribal man carrying sister skeleton to bank in Odisha investigation orderedTribal man carrying sister skeleton to bank in Odisha investigation ordered

Odisha Bank Case Investigation by CM Mohan Majhi

ओडिशा के नुआपाड़ा जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां एक मजबूर भाई को अपनी मृत बहन के बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए उसका कंकाल खाट पर लादकर बैंक पहुंचना पड़ा। इस घटना के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सीएम मोहन माझी ने दिए जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को आम जनता के प्रति अधिक संवेदनशील और मानवीय व्यवहार करने की सख्त हिदायत दी है।

नुआपाड़ा जिले के कोमना ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले सानपहाड़ गांव के निवासी गुंजाबर देई की कुछ महीने पहले मृत्यु हो गई थी। उनकी बहन ईश्वरी देई के बैंक खाते में प्रधानमंत्री आवास योजना की किस्त और अन्य बचत के पैसे जमा थे। गुंजाबर को अपनी बहन के अंतिम संस्कार और घर की जरूरतों के लिए इन पैसों की सख्त जरूरत थी, लेकिन बैंक प्रबंधन नियमों का हवाला देकर भुगतान में देरी कर रहा था।

थक-हारकर गुंजाबर ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया। वह अपनी बहन के अवशेषों (कंकाल) को एक खाट पर रखकर बैंक की शाखा तक ले गया ताकि वह बैंक अधिकारियों को यह साबित कर सके कि उसकी बहन की मृत्यु हो चुकी है और वह उसका कानूनी उत्तराधिकारी है। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों और बैंक कर्मचारियों को झकझोर कर रख दिया।

प्रशासनिक तत्परता और आर्थिक सहायता

जैसे ही यह मामला मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक पहुंचा, प्रशासन हरकत में आ गया। मुख्यमंत्री मोहन माझी ने इस पूरी घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी तंत्र में संवेदनशीलता की कमी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद, जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रभावित आदिवासी व्यक्ति को जिला रेड क्रॉस कोष से 30,000 रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की।

बैंक ने जारी किया बकाया भुगतान

शुरुआती आनाकानी के बाद, बैंक प्रबंधन ने भी अपनी प्रक्रिया में तेजी दिखाई। ईश्वरी देई के खाते में जमा बकाया राशि को औपचारिकताएं पूरी करने के बाद गुंजाबर को सौंप दिया गया है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि केवाईसी और उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की कमी के कारण तकनीकी बाधाएं आ रही थीं, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए अब भुगतान कर दिया गया है।

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सीएम मोहन माझी ने दिए जांच के आदेश और संवेदनशीलता की अपील

मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टर को इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नियम प्रक्रियाओं के लिए होते हैं, लेकिन मानवीय गरिमा से बढ़कर कुछ नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में काम करने वाले बैंक कर्मियों और सरकारी कर्मचारियों को स्थानीय लोगों की समस्याओं को सहानुभूतिपूर्वक सुनने का निर्देश दिया है।

सिस्टम पर उठते गंभीर सवाल

यह घटना आधुनिक बैंकिंग प्रणाली और ग्रामीण भारत की जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर करती है। हालांकि डिजिटल इंडिया के दौर में सेवाएं बेहतर हुई हैं, लेकिन एक गरीब व्यक्ति को अपने ही हक के पैसे के लिए मृत परिजन का कंकाल बैंक ले जाना पड़े, यह प्रशासनिक विफलता का बड़ा संकेत है।

FAQs

Q1. ओडिशा के नुआपाड़ा में व्यक्ति अपनी बहन का कंकाल बैंक क्यों ले गया?

उत्तर: गुंजाबर देई नामक व्यक्ति को अपनी मृत बहन ईश्वरी देई के बैंक खाते से पैसे निकालने थे। बैंक अधिकारी कथित तौर पर सत्यापन और दस्तावेजों की कमी के कारण भुगतान नहीं कर रहे थे, जिसके कारण मजबूर होकर उसे पहचान साबित करने के लिए कंकाल बैंक ले जाना पड़ा।

Q2. इस मामले पर मुख्यमंत्री मोहन माझी ने क्या कार्रवाई की?

उत्तर: मुख्यमंत्री ने इस घटना को अत्यंत दुखद बताया और सीएम मोहन माझी ने दिए जांच के आदेश जारी किए। उन्होंने जिला प्रशासन को मामले की गहराई से जांच करने और अधिकारियों को जनता के प्रति संवेदनशील रहने के निर्देश दिए हैं।

Q3. पीड़ित आदिवासी व्यक्ति को कितनी आर्थिक सहायता दी गई है?

उत्तर: मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद, जिला प्रशासन ने प्रभावित व्यक्ति को जिला रेड क्रॉस कोष से 30,000 रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की है।

Q4. क्या बैंक ने अब खाते से पैसे जारी कर दिए हैं?

उत्तर: हाँ, घटना के तूल पकड़ने और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद, बैंक ने औपचारिकताएं पूरी करते हुए मृतक महिला के खाते में जमा बकाया राशि उसके भाई को सौंप दी है।

Q5. यह घटना ओडिशा के किस जिले की है?

उत्तर: यह घटना ओडिशा के नुआपाड़ा (Nuapada) जिले के कोमना ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले सानपहाड़ गांव की है।

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